दिल्ली की एक फास्ट ट्रैक अदालत ने झूठे रेप केस मे एक युवक को फँसाने के मामले मे महिला को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर उसे यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाने की क्यों न दी जाये।

कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज को आधार बनाते हुए कहा, युवती और आरोपी के बीच आपसी सहमति से सेक्शुअल ऐक्ट हुआ। जज अनु ग्रोवर बलिगा ने कहा, ‘फुटेज में युवती आरोपी को हग करती और किस करती हुई दिख रही है। यही नहीं वह आरोपी के कपड़े उतारते हुए भी नजर आ रही है।’

बता दें कि महिला 2007 में तलाक लेने के कुछ दिनों बाद मैट्रिमॉनियल पोर्टल के जरिए युवक के संपर्क मे आई थी। जिसके बाद महिला ने उस व्यक्ति के नाम पर एक फ्लैट पर लीज पर लिया, जिसमें वह अपनी बेटी के साथ रहने लगी।

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19 मार्च, 2013 को मकान मालिक की ओर से घर खाली करने का नोटिस मिला। जिसके बाद आरोपी के घर पहुंची। महिला के मुताबिक वहां पहुंचने पर आरोपी ने उसे कॉफी पिलाई, जिसके बाद वह बेहोश हो गई। लेकिन, जब वह होश में आई तो अर्धनग्न थी और उसके यौनांग पर टिशू पेपर लगा हुआ था।

जज अनु ग्रोवर ने महिला के दावों को खारिज करते हुए कहा,  यह साइंटिफिक एविडेंस बताता है कि महिला ने खुद के साथ रेप होने का गलत आरोप लगाया। कोर्ट ने आरोपी को आरोपो से बरी करते हुए कहा कि रेप का गलत आरोप लगाने के लिए महिला को सजा दी जानी चाहिए।

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