Monday, July 26, 2021

 

 

 

बाजार में बिक रहा झाड़ू वाली घास से बना नकली जीरा, गैंग का हुआ भंडाफोड़

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नई दिल्ली:  दिल्ली के बवाना इलाके में पुलिस ने नकली जीरा बनाने वाली फैक्टरी का फंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले में बवाना के पूंठखुर्द में स्थित नकली जीरा बनाने वाले फैक्टरी के मालिक सहित 4 मजदूरों को भी गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की पहचान यूपी के जलालाबाद निवासी हरिनंदन, कामरान उर्फ कम्मू, गंगा प्रसाद, हरीश और पवन के रूप में हुई है।

पुलिस ने फैक्ट्री से 20 हजार किलो तैयार नकली जीरा और 8 हजार किलो कच्चा माल बरामद किया है। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी फूल झाड़ू के चूरे में गुड़ का शीरा और पत्थर का पाउडर मिलाकर नकली जीरा तैयार करते थे। फिर नकली जीरे को असली जीरे में 80:20 के अनुपात में मिलाकर लाखों रुपये में बेच दिया करते थे।

मामले की जांच कर रही पुलिस ने बताया कि गिरोह ज्यादा पैसा कमाने के लिए अपनी नकली जीरा बनाने वाली फैक्टरी को यूपी के शाहजहांपुर से दिल्ली में शिफ्ट कर लिया था। गिरोह नकली जीरा बनाकर दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश और गुजरात के कई जिलों में सप्लाई करते थे।

मामले की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने दिल्ली में तीन महीने पहले फैक्टरी लगाई थी। पुलिस की गिरफ्त में आरोपियों ने बताया कि शाहजहांपुर के जलालाबाद में रहने वाले ज्यादातर लोगों का नकली सामानों का ही धंधा है। आरोपियों ने बताया कि वे 100 किलो जीरा तैयार करने के लिए 80 किलो असली जीरे में 20 किलो नकली जीरा मिलाते थे। पुलिस ने बताया कि 100 किलो जीरा बेचने पर उन्हें 8 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ होता था।

ऐसे बनाया जाता था नकली जीरा

यूपी में 5 रुपये किलो में यह घास मिल जाती है। वहां से ट्रकों और ट्रैक्टरों में पशुओं के लिए या फूल झाड़ू बनाने की बताकर फैक्ट्री तक लाया जाता है। उसकी घास को झाड़ लिया जाता है। जिसमें से बड़ी मात्रा में जीरे के आकार की पत्तियां झड़ जाती हैं। गुड़ को गर्म कर उसका शीरा बना लिया जाता था। उसमें वहीं दाने डाल दिए जाते हैं। दोनों को मिलाने के बाद कुछ देर बाद बाहर निकाल दिया जाता है। फिर उसे सुखाया जाता है। जिसमें बाद में पत्थर का पाउडर मिलाया जाता है। लोहे की बड़ी छलनी ली जाती है। मिक्स सामान को डालकर छलनी से छाना जाता है। जिसमें से नकली जीरा निकलता है। जिसको बाद में सुखाया जाता है। जीरे जैसा रंग आ जाए इसके लिए पत्थरों व स्लरी का पाउडर फिर से डाला जाता है। खास बात यह कि सामान्य जीरे की तरह इसमें किसी तरह की खुशबू नहीं होती। फैक्ट्री में मजदूरों को दो रुपये किलो के हिसाब से मजदूरी दी जाती है। नकली जीरे बनाने की फैक्ट्री चलाने के मास्टरमाइंड ज्यादातर यूपी के शाहजहांपुर स्थित जलालाबाद के हैं।

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