Friday, July 30, 2021

 

 

 

12 साल बाद बेगुनाह रिहा हुए फाजिली का आरोप – दिल्ली पुलिस ने खिलाया था मल, डिटर्जेंट वाला पानी पिलाया गया

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साल 2005 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट मामले में करीब 12 साल जेल की सजा काटने के बाद आखिरकार मोहम्मद हुसैन फाजिली को को रिहाई मिल गई. जेल से छूटे मोहम्मद हुसैन फाजिली खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल टीम ने उसके श्रीनगर स्थित घर से करीब 12 साल पहले उठाया था.

इसके साथ ही फाजिली ने जेल के दौरान पुलिस के टार्चर की दास्तान भी सुनाई. जिसमे उन्होंने बताया कि उनके साथ जानवरों से भी बद्दतर व्यवहार किया गया. उन्होंने कहा, पुलिस रिमांड में लिए जाने के शुरुआती 50 दिनों में हर एक दिन दिल्ली पुलिस ने उनके साथ मानसिक से लेकर शारीरिक प्रताड़ना तक हर तरीका अपनाया.

फाजिली ने बताया, “मुझे वो दिन अभी भी याद हैं. वो हमारे मुह में मल डाल देते थे और फिर ऊपर से रोटी व पानी ठूस देते थे ताकी हम उसे निगल सकें.” फाजिली ने कहा कि उन्हें पुलिस रिमांड के लिए कोर्ट ले जाने से पहले ही उनपर यातनाएं शुरू हो गई थीं. उसने कहा, “हम जैसे ही दिल्ली पहुंचे, हमें लोधी कालोनी स्थित पुलिस स्टेशन ले जाया गया. एक बेंच से मेरे हाथ बांध दिए गए और उसपर लेटने को कहा गया. दो पुलिसवाले मेरे पांव पर खड़े हो गए और एक मेरे पेट पर चलने लगा। एक अन्य पुलिसवाले ने मुझे डिटर्जेंट वाला पानी पिला दिया.”

फाजिली ने कहा, जब उन्हें शाम को कोर्ट ले जाया जा रहा था तो धमकी दी गई कि जज से कोई शिकायत ना की जाए. फाजिली ने बताया, “उन्होंने कहा कि जज साहब के सामने कुछ बोलने की हिम्मत मत करना… अगर ऐसा किया तो इससे भी बुरा होगा.” उसने कहा कि पुलिस ने उनपर 200 ब्लैंक पेपर्स साइन करने का भी दबाव बनाया. फाजिली के मुताबिक उनकी 50 दिन की रिमांड खत्म होने पर उन्हें तिहाड़ जेल में डाला गया. उसने कहा, “तिहाड़ी में हमें टॉर्चर नहीं किया गया। लेकिन वहां पर हमला होने का डर था. वहां बंद कैदियों ने शुरुआत में हमें डराया. वो मुझसे दो किलोमीटर तक झाड़ू लगवाते थे. लेकिन बाद में उनका व्यवहार भी बदल गया. जिस दिन मुझे बरी किया गया जेल में मिठाईयां बांटी गई.”

इसी तरह फाजली के साथ बेगुनाह रिहा हुए रफीक शाह ने 2008 में कोर्ट को बताया कि उनके साथ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पानी की जगह पेशाब और दूसरे आरोपियों के प्राईवेट पार्ट चूसने तथा सुवर से पूरा शरीर चटवाने एवं पैंट में चूहे डालने  तक का काम किया. रफीक ने कहा यह सब उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था.

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