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रमजान के पाक महीने मे जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में दुर्लभ क़ुरानों की प्रदर्शनी आज से शुरू हो गई है। इस प्रदर्शनी मे विभिन्न प्रकार की कलिग्रफी को भी देखा जा सकता है।

ईस प्रदर्शनी का आयोजन ईरान कल्चर हाउस और जामिया मिल्लिया की डॉक्टर जाकिर हुसैन लाइब्रेरी ने संयुक्त रूप से किया. ये प्रदर्शनी 15 जून तक चलेगी. प्रदर्शनी का उद्घाटन भारत में ईरान के राजदूत मसूद रिज़वानियान ने किया.

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डॉक्टर जाकिर हुसैन लाइब्रेरी के लाइब्रेरियन डॉक्टर हसन जमाल आबिदी ने बताया कि जामिया के इस पुस्तकालय में 500 साल तक के हाथ से लिखें कुरान की प्रतियां है. प्रदर्शनी में सातवीं से 14वीं सदी तक की खुशखती (कलिग्रफी ) के तरह-तरह के नमूने पेश किए गए हैं. देश के विभिन्न हिस्सों के मशहूर खुशखती (कलिग्रफी ) ख़त्तात आये हैं और वह प्रदर्शनी में इस कला का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हैं.

जामिया मिल्लिया के वाइस चांसलर प्रोफेसर तलत अहमद ने इस प्रदर्शनी की अहमियत को बताते हुए कहा कि इस के जरिए विश्व की एक बेहतरीन कला खुशखती (कलिग्रफी) के हजारों आयामों से छात्रों और आम लोगों को रूबरू होने का मौका मिलता है.

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उन्होंने कहा जामिया मिल्लिया को गर्व है कि उसके पास 500 साल तक के हस्तलिखित क़ुरानो का संग्रहण है.  उन्होंने कहा कि संस्कृति और कला के संरक्षण में जेएमआई की हमेशा से दिलचस्पी रही है.

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