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नागपुर | 2014 में नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद अचानक से हिंदुत्व का मुद्दा गरमा गया. बीजेपी के कुछ नेताओ और मंत्रियो ने हिन्दुओ को ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह तक दे डाली. इन लोगो का तर्क था की देश में मुस्लिमो की जनसँख्या , हिन्दुओ के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ रही है. इसलिए हिन्दूओ को भी उसी अनुपात में बच्चे पैदा करने होगे. तब इस तरह के बयानों की खूब आलोचना हुई थी. लेकिन एक बार फिर यह मुद्दा उठा है.

नागपुर में आरएसएस द्वारा आयोजित तीन दिवसीय धर्म संस्कृति महाकुम्भ का रविवार को समापन हो गया. इस कार्यक्रम में कई ऋषियों, शंकराचार्य , महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनविस , सिटी मेयर प्रवीन दातके और असं के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित शामिल हुए. आरएसएस के इस महाकुम्भ में वक्ताओं ने हिंदुत्व पर ज्यादा जोर दिया. यही वजह थी की महाकुम्भ का सम्पना भी ‘हिन्दू बचाओ’ के नारे के साथ हुआ.

लोगो को संबोधित करते हुए ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने हिन्दुओ की संतुलित जनसँख्या पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा की हिन्दुओ को भी दो बच्चो का नियम त्यागकर 10-10 बच्चे पैदा करने चाहिए. हिन्दुओ को यह नही सोचना चाहिए की उनको कौन पलेगा. भगवान् सब बच्चो का पालन पोषण करेगा. वासुदेवानंद ने गोहत्या पर बोलते हुए कहा की प्रधानमंत्री मोदी को इस पर ऐसे ही निर्णय लेना चाहिए जैसे नोट बंदी पर लिया.

विश्व हिन्दू परिषद् की प्रवीन तोगड़िया ने गौहत्या पर रोक लगाने सम्बन्धी कानून को जल्द पारित करने की मांग की. उन्होंने कहा की सरकार का इस कानून को लेकर टाल मटोल वाला रवैया रहा है. इस पर जल्द फैसला होना चाहिए. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने प्रवीन तोगड़िया का समर्थन करते हुए गौहत्या पर रोक लगाने सम्बन्धी कानून की वकालत की.  मालूम हो की प्रवीन तोगड़िया बहुत पहले से हिंदुत्व के समर्थन में बात करते आये है.


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