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सुप्रीम कोर्ट ने कड़े दिशा-निर्देशों के साथ इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी है. लेकिन अब इस फैसले को लेकर सवाल उठाना भी शुरू हो चुके है.

देवबंदी उलेमाओं ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि इस्लाम में इच्छामृत्यु नाजायज ही नहीं बल्कि हराम भी है. इस्लाम में बीमारी या मुसीबत में भी मौत की दुआ करने की भी इजाजत नहीं दी गई है.

मौलाना सलिम अशरफ कासमी ने कहा कि इस्लाम में ये जायज नहीं है. ऐसी स्थिति ही पैदा नहीं होनी चाहिए, जिससे किसी को आत्महत्या करनी पड़े. समाज में सभी को सिर उठाकर जीने का हक मिला हुआ है.

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उन्होंने कहा कि जीवन और मृत्यु अल्लाह के हाथ में है. इसमें मनुष्य का कोई हस्तक्षेप नहीं. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों के संविधान पीठ ने गाइडलाइन जारी कहा कि इंसानों को भी पूरी गरिमा के साथ मौत को चुनने का अधिकार है. ऐसे में अब लाइलाज लोगों या लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर जी रहे लोगों को प्राण त्यागने की इजाजत होगी.