धारा 370 हटाए जाने के बाद यूरोपीय यूनियन के राजनयिक सहित 25 विदेशी राजनयिकों बुधवार को कश्मीर का दौरा कर जमीनी हालात जानने की कोशिश की। राजनयिकों की ये यात्रा सरकार की और से आयोजित थी।

यूरोपीय यूनियन की तरफ से शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया, ‘भारत सरकार ने स्थिति को सामान्य बनाने के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। लेकिन इंटरनेट एक्सेस और मोबाइल सेवाओं पर अभी भी पाबंदी है… साथ-साथ कुछ राजीतिक नेता अभी भी हिरासत में हैं।

यूरोपीय संघ के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के प्रवक्ता वर्जिनी बट्टू हेनरिक्सन के बयान के अनुसार, ‘हालांकि हम गंभीर सुरक्षा चिंताओं को समझते हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि शेष प्रतिबंधों को तेजी से हटाया जाए। इससे पहले जनवरी में 15 विदेशी राजनयिकों का एक दल जम्मू-कश्मीर गया था और स्थिति का आकलन किया था. इस दल में अमेरिकी राजदूत केनेथ आई जस्टर भी शामिल थे।

भारत में मेक्सिको के राजदूत एफएस लोटेफने कहा, ‘हमने राज्य में क्या हो रहा है, उसका जायजा लिया। ऐसा लगता है कि यहां स्थिति सामान्य हो रही है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें कोई परेशानी नहीं है। लेकिन स्थिति में सुधार करने की इच्छा दिख रही है, यहां के अधिकारी भी इसे बेहतर करने के लिए उत्सुक हैं।’

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