Monday, October 18, 2021

 

 

 

नोटबंदी: रोजगार तो मिला नहीं बल्कि 4 महीनों में चली गई 15 लाख नौकरियां

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केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी के एतिहासिक फैसले ने लोगों का जो रोजगार छीनने का सिलसिला शुरू किया था. वो अब भी लगातार जारी है. पिछले 4 महीनों के दौरान 15 लाख लोगों को अपनी नौकरियां खोनी पड़ी है.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2017 के बीच पिछले वित्त के इन्ही महीनों की तुलना में नौकरियों में भारी गिरावट देखी गई है.भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के रोजगार सर्वे के आंकड़े भी इन आकड़ों पर अपनी मुहर लगा रहे है.

सीएमआईई के अनुमान के मुताबिक जनवरी-अप्रैल 2017 के दौरान कुल 40.50 करोड़ नौकरी वाले थे. लेकिन उससे पहले के चार महीनों में ये संख्या 40.65 करोड़ थी. ऐसे में सीएमआईई के आकड़ों के तहत जनवरी से अप्रैल तक करीब 15 लाख नौकरियां चली गईं.

इन आकड़ों की तरह ही प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के आकड़ें भी मिलते-जुलते है. पीएमकेवीवाई के जुलाई 2017 के पहले हफ्ते के आंकड़ों के अनुसार पूरे देश में केवल 30.67 लाख लोगों को इस योजना के तहत प्रशिक्षण दिया गया लेकिन उनमें से करीब 10 प्रतिशत (2.9 लाख) को ही नौकरी मिली.

वहीँ श्रम मंत्रालय के अक्टूबर-दिसंबर 2016 की तिमाही के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के आखिरी तीन महीनों में आठ प्रमुख सेक्टरों में 1.52 लाख अस्थायी और 46 हजार कैजुअल नौकरियां चली गईं, जबकि कुल कागमारों की संख्या में 1.22 लाख की बढ़ोतरी हुई थी.

हालांकि दवा और ऑटोमोबाइल सेक्टर में पिछले एक साल में रोजगार की संख्या बढ़ी है. मसलन, एबोट इंडिया के कर्मचारियों में पिछले एक साल में 3127 कर्मचारियों की बढ़ोतरी हुई.

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