नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने सितंबर 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखा था कि चुनावी बॉन्ड जैसी स्कीम की अनुमति देना काफी जोखिम भरा है, इससे केंद्रीय बैंक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचेगा और यह भी उसे चेतावनी दी थी कि नोटबंदी से लाभ कम होगा।

आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज द्वारा पहुँचाए गए पत्र के अनुसार, पटेल ने एक अनुसूचित बैंक को मुद्रा जैसे उपकरणों को जारी करने की अनुमति देने के सरकार के फैसले के बारे में कई चिंताओं को उठाया था, जिससे इस भूमिका को निभाने के लिए RBI के अनन्य प्राधिकरण को हटा दिया गया था।

पटेल ने पत्र में कहा, “आप इस बात से सहमत होंगे कि केंद्रीय बैंक के अलावा किसी अन्य संस्था को बियरर बॉन्ड जारी करने की इजाजत नहीं दी जा रही है, जो कि इंस्ट्रूमेंट की तरह मुद्रा हैं, काफी जोखिम के साथ और यहां तक कि इलेक्टोरल बॉन्ड पर भी लागू होती हैं।”

“सामान्य रूप से भारत की वित्तीय प्रणाली और विशेष रूप से केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता इस तरह के अपवाद का योजना के बारे में सार्वजनिक धारणा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।” पटेल ने यह भी कहा था कि शेल कंपनियों के माध्यम से इस योजना का दुरुपयोग किया जा सकता है। “यह आरबीआई को मनी लॉन्ड्रिंग लेनदेन की सुविधा के एक गंभीर प्रतिष्ठित जोखिम के अधीन कर सकता है।”

पूर्व गवर्नर पटेल ने इस मामले में साल 2017 में जुलाई के अंत में जेटली से मुलाकात के बाद सीधे हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया था। साल 2017 में अगस्त से सितंबर के दौरान वित्त मंत्रालय रिजर्व बैंक पर इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम का मसौदा  तैयार करने के लिए जोर डाल रहा था। उस दौरान ही पटेल ने वित्त मंत्रालय को ये तीन पत्र लिखे थे।

मालूम हो कि तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2017-18 के अपने बजट भाषण में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की घोषणा की थी। इससे पहले मीडिया में इस आशय की भी खबरें प्रकाशित हुई थी कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की घोषणा से पहले विधि मंत्रालय और मुख्य चुनाव आयुक्त की तरफ से भी विरोध  जताया गया था।

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