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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक के बाद एक लगातार गुजरात दौरों से परेशान कांग्रेस ने राज्य में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा नहीं होने पर चुनाव आयोग को निशाने पर लिया था. ऐसे में अब मुख्य चुनाव आयुक्त ने तारीखों की घोषणा न होने की वजह बताई है.

मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार जोती ने कहा कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव एक साथ चुनाव न कराने की वजह हिमाचल प्रदेश में ठण्ड का अधिक होना है. जोती ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के प्रशासन ने दिसंबर के दौरान ठंड और बर्फबारी का हवाला देते हुए जल्द चुनाव संपन्न कराने की मांग की थी.

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जोती ने बताया कि जब हम हिमाचल प्रदेश गए तब वहां पर राज्य निर्वाचन आयोग के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियां भी मौजूद थीं. वहीं पर राज्य प्रशासन ने आग्रह किया था कि किन्नौर, लाहुल स्पीति और चंबा जिले में देर से चुनाव करवाने से बर्फबारी का समय आ जाएगा. इस वजह चुनाव नवंबर के शुरुआती हफ्ते में ही करवाए जाएं ताकि वोटरों को वोट करने में कोई परेशानी नहीं हो.

उन्होंने बताया कि गुजरात चुनाव की तारीखों में देरी का कारण एक यह भी है कि हिमाचल में आने वाले नतीजों का प्रभाव वहां न पड़े. जोती ने कहा कि एक कारण यह भी है कि दोनों राज्य कई मायनों में अलग है और उन्हीं राज्यों के चुनाव साथ-साथ कराए जाते हैं, जो कहीं-न-कहीं एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं.

न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में जोति ने कहा, चुनाव आयोग किसी भी तरह पोल प्रोसेस में दखल नहीं देगा. हम किसी भी राजनीतिक दल को खास तवज्जो नहीं दे रहा. हमने सभी राजनीतिक दलों को एक समान मौके दिए हैं. हमने किसी भी दल को राज्य में रैली करने या न करने के लिए नहीं कहा है. कल पीएम गुजरात गए थे. आज राहुल गांधी गुजरात में हैं.

जोति ने 2001 के मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के मेमोरेंडम का हवाला देते हुए कहा, चुनाव आयोग किसी भी इलेक्शन की तारीख उस डेट से 3 हफ्ते पहले तक घोषित नहीं कर सकता, जिस दिन अन्य चुनाव का नोटिफिकेशन दिया जा चुका हो. चुनाव की तारीख की घोषणा होने पर उस राज्य में आचार संहिता लागू हो जाती है. और वो तब तक लागू रहती है, जब तक चुनाव नहीं हो जाते.

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