सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने वह आपराधिक मामलों में दोषी ठहराये गए लोगों के चुनाव लड़ने के साथ ही न्यायपालिका और कार्यपालिका में उनके प्रवेश को रोकने के पक्ष में है.

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा है कि जिन नेताओं को दोषी ठहराया जा चुका है, उन पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए. फिलहाल दोषी ठहराया गया कोई शख्स 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता. इसके अलावा पेड न्यूज पर प्रतिबंध लगाने, चुनाव से 48 घंटे पहले प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों पर प्रतिबंद्ध लगाने, घूस लेने को संज्ञानीय अपराध बनाने और चुनाव खर्च के प्रावधानों में संशोधन के प्रस्ताव शामिल हैं.

विधायकों के लिए न्यूनतम योग्यता और अधिकतम आयु की सीमा तय करने से जुड़ी मांग पर आयोग ने कहा कि यह मुद्दा कानूनी दायरे में आता है और इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा. आयोग का कहना हैं कि वह राजनीति के अपराधीकरण के मुद्दे को संवैधानिक और वैधानिक ढांचे के तहत उठा रहा है. इस मुद्दे पर आयोग के कार्यों और शक्तियों से जुड़े आर्टिकल 324 की भी मदद ली जा रही है.

दरअसल बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में मांग की है कि नेताओं और नौकरशाहों के खिलाफ चल रहे मुकदमों की सुनवाई एक साल में पूरा करने के लिये स्पेशल फास्ट कोर्ट बनाया जाए. याचिका में ये भी कहा गया है कि सजायाफ्ता व्यक्ति के चुनाव लड़ने, राजनीतिक पार्टी बनाने और पार्टी पदाधिकारी बनने पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए. चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और अधिकतम आयु सीमा निर्धारित किया जाए और चुनाव आयोग, विधि आयोग और जस्टिस वेंकटचलैया आयोग के सुझावों को तत्काल लागू किया जाए.

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