नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावो के नतीजे आने के बाद विपक्षी दलों ने ईवीएम् पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए थे की वोटिंग मशीन में छेड़छाड़ कर बीजेपी ने चुनाव जीते है. यह आरोप सबसे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने लगाया लेकिन बाद में लगभग सभी विपक्षी दलों ने उनकी हाँ में हाँ मिलाई. हालाँकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया की ईवीएम् में छेड़छाड़ संभव नही है.

लेकिन मध्य प्रदेश के भिंड से आई एक विडियो ने चुनाव आयोग के दावों पर सवाल खड़े कर दिए. यहाँ एक ईवीएम् में कोई भी बटन दबाने पर कमल के निशाने की पर्ची निकल रही थी. इस विडियो के वायरल होने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर चौंव आयोग को चुनौती दी की आप हमें 72 घंटे के लिए ईवीएम् दे दे , हम साबित कर देंगे की इसमें छेड़छाड़ संभव है.

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पोल पैनल के सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग केजरीवाल की चुनौती पर गंभीरता से विचार कर रहा है. उनका कहना है की हम जल्द ही एक ओपन चैनल आयोजित करेंगे और जल्द ही इसकी तारीख भी घोषित कर दी जाएगी. हम इसमें सभी राजनितिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रण देंगे, इसके अलावा अगर कोई और एक्सपर्ट ईवीएम् में छेड़छाड़ का दावा करता है तो भी इस चैलेंज में शामिल हो सकता है.

बताते चले की चुनाव आयोग ने 2009 में भी इसी तरह का एक ओपन चैलेंज आयोजित किया था. उस समय काफी लोग इसमें शामिल हुए थे लेकिन कोई भी ईवीएम् में छेड़छाड़ साबित नही कर पाया था. केजरीवाल की चुनौती देने के बाद चुनाव आयोग ने दोबारा इस चैलेंज को आयोजित कराने का फैसला किया है. इससे ईवीएम् की विश्‍वसनीयता पर उठ रहे सवालों का भी जवाब मिल जायेगा.

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