नयी दिल्ली | आगामी विधानसभा चुनावो से ठीक तीन दिन पहले आ रहे आम बजट को रुकवाने के लिए विपक्ष एडी चोटी का जोर लगा रही है. विपक्ष को डर है की सरकार बजट के बहाने मतदाताओ को प्रभावित कर सकती है. यही कारण है की आजाद भारत के इतिहास में आज तक कोई भी आम बजट चुनावो से पहले पेश नही किया गया है.

बजट को 8 मार्च के बाद स्थान्तरित करने की मांग को लेकर विपक्ष का एक प्रतिनिधि मंडल चुनाव आयोग गया था. खबर है की विपक्ष की मांग पर गौर करते हुए चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. चुनाव आयोग ने कैबिनेट सेक्रेट्री को पत्र लिखकर 10 जनवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा है.

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाब नबी आजाद ने बताया की 31 मार्च से पहले कभी भी बजट पेश किया जा सकता है. इससे पहले भी ऐसी स्थितिया आई है. तब सत्ता पक्ष ने बजट पेश करने की तारीखों को आगे बढ़ा दिया था. 2012 में इन्ही राज्यों के विधानसभा चुनावो के दौरान बीजेपी ने खुद मांग की थी की बजट की तारीखों को आगे बढाया जाए.

गुलाब नबी ने आगे कहा की तब युपीए सरकार ने बजट को मार्च तक के लिए टाल दिया था. यह सत्ता पक्ष की तरफ से शुरू की गयी एक प्रथा है. हमने इसके लिए महामहिम राष्ट्रपति जी को भी पत्र लिखा है. उधर केन्द्रीय संसदीय मंत्रालय की तरफ से कहा गया है की बजट 1 फरवरी को ही पेश किया जाएगा. केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने कहा की हम चुनाव आयोग के आदेशो का पालन करेगें. लेकिन फ़िलहाल बजट की तारीख आगे बढ़ाने का कोई इरादा नही है.

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