Wednesday, June 23, 2021

 

 

 

अखिलेश के अध्यक्ष बनने के बाद समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह हो सकता है जब्त

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नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सियासी कुनबे और देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी समाजवादी पार्टी के भविष्य पर अंधकार के बादल मंडराए हुए है. फ़िलहाल पार्टी के अन्दर दो गुट बन चुके है और दोनों ही पार्टी पर अपना अधिकार जमा रहे है. ऐसे में पार्टी पर किस धड़े पर रहेगी यह सबसे बड़ा सवाल है? अखिलेश के पार्टी अध्यक्ष नियुक्त होने के फैसले को ही असंवैधानिक करार दिया है.

उधर खबर है की पार्टी के राष्ट्रिय महासचिव रामगोपाल यादव आज ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए है. रामगोपाल कल चुनाव आयोग पहुंचकर उनको विशेष अधिवेशन में पास हुए प्रस्तावों की जानकारी देंगे. इसमें सबसे अहम् अखिलेश को पार्टी और संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त करने की जानकारी अहम् है. इस पुरे एपिसोड के सूत्रधार रामगोपाल चुनाव आयोग को यह बताना चाहते है की पार्टी में अब अखिलेश के फैसले ही मान्य होंगे.

उधर रामगोपाल के ऐसे किसी तरह के कदम को निष्प्रभावी बनाने के लिए शिवपाल यादव भी दिल्ली के लिए निकल गए है. खबर है की शिवपाल कल चुनाव आयोग पहुंचेगें और उनको संसदीय कार्यकारिणी में लिए गए फैसले से अवगत कराएँगे. इसके अलावा शिवपाल ने रामगोपाल यादव की बर्खास्तगी की चिट्ठी स्पीड पोस्ट से चुनाव आयोग भेज दी है.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है की आखिर चुनाव आयोग किसके पक्ष को मजबूत समझेगा और पार्टी का अधिकारिक बॉस किसको मानेगा? अगर कानून की बात करे तो ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग के पास पार्टी सिंबल ( साइकिल ) को जब्त करने के अलावा कोई चारा नही बचेगा. अगर दोनों पक्ष पार्टी पर अधिकार को लेकर अड़े रहे तब की स्थिति में चुनाव आयोग को अधिकार है की वो पार्टी सिंबल को फ्रीज कर दे.

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