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नई दिल्ली । दिल्ली में 67 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी को झटका लग सकता है। चुनाव आयोग ने आप के 20 विधायकों की सदस्यता को रद्द कर दिया है। अब इस फ़ैसले को अंतिम मंज़ूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। हालाँकि आम आदमी पार्टी का कहना है की चुनाव आयोग को सदस्यता रद्द करने का अधिकार नही है।

दरअसल दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने पार्टी के 21 विधायको को संसदीय सचिव बनाया था। जबकि नियम के मुताबिक़ दिल्ली में केवल एक संसदीय सचिव बन सकता है। इसलिए सरकार के फ़ैसले को चुनौती देते हुए प्रशांत पटेल नामक व्यक्ति ने अदालत में एक याचिका दाख़िल की। प्रशांत पटेल का आरोप था की संसदीय सचिव एक लाभ का पद है इसलिए इन विधायकों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए।

बाद में अदालत ने इस फ़ैसले को चुनाव आयोग को सौंप दिया था। शुक्रवार को इस मामले में चुनाव आयोग की और से फ़ैसला ले लिया गया है। बताया जा रहा है की आयोग ने सभी विधायकों को अयोग्य क़रार दिया है। इसलिए माना जा रहा है की आयोग, राष्ट्रपति से सभी 20 विधायकों की सदस्यता को रद्द करने की सिफ़ारिश कर सकता है।

मालूम हो की संविधान के अनुच्‍छेद 102(1)(A) और 191(1)(A) के अनुसार संसद या फिर विधानसभा का कोई सदस्य अगर लाभ के किसी पद पर होता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है। उधर चुनाव आयोग के फ़ैसले पर ख़ुशी जताते हुए प्रशांत पटेल ने कहा की दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव ने आयोग को दिए अपने हलफनामा में माना है कि विधायकों को मंत्रियों की तरह सुविधा दी गई। दिल्ली में 7 विधायक मंत्री हो सकते हैं, लेकिन इन्होंने 28 बना दिए। फ़िलहाल आम आदमी पार्टी की और से कोई प्रतिक्रिया नही आयी है।

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