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नई दिल्ली | चुनाव आयोग ने ऐसी 200 पार्टिया चिन्हित की है जिनका अस्तित्व केवल कागजो पर है. इन पार्टियों ने 2004 से अब तक कोई भी चुनाव नही लड़ा है. चुनाव आयोग को शक है की इन पार्टियों का गठन केवल कालेधन को सफ़ेद करने के लिए किया गया है. चुनाव आयोग इन पार्टियों की मान्यता रद्द करने पर विचार कर रहा है.

मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग , सभी 200 पार्टियों की डिटेल आयकर विभाग को भेज रहा है. चुनाव आयोग यह जानना चाहता है की इन पार्टियों में अभी तक कोई वित्तीय लेनदेन हुआ है या नही. अगर ऐसी कोई जानकारी सामने आती है तो संभव है की इन पार्टियों का इस्तेमाल मनी लौंड्रीग के लिए हो रहा हो. इसके बाद आयकर विभाग इन पार्टियों को इनकम टैक्स के तहत मिलने वाली छूट भी समाप्त कर सकेगा. इसके अलावा चुनाव आयोग इन सभी पार्टियों की मान्यता रद्द करने की कार्यवाही भी शुरू कर चूका है.

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इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार चुनाव आयोग ने सभी पार्टियों की जानकारी केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर (CBDT) को भेज दी है. चुनाव आयोग के अधिकारियो के अनुसार यह तो महज शुरुआत है. चुनाव आयोग उन सभी पार्टियों की जानकारी जुटा रहा है जो चुनाव लड़ने के लिए गठित नही की गयी और जिन्होंने अभी तक इनकम टैक्स रिटर्न फिल नही किया है. ऐसी बहुत सी पार्टिया है जो रिटर्न फिल करती होंगी लेकिन वो इससे सम्बंधित कागजात चुनाव आयोग में जमा नहीं करते.

नोट बंदी के बाद से राजनितिक दलों द्वारा चंदा लेने के तरीको को लेकर बहस छिड़ी हुई है. लोगो की मांग है की सभी राजनितिक दल अपने चंदे का हिसाब चुनाव आयोग को दे. इसमें उन लोगो की जानकारिया भी होनी चाहिए जिन्होंने 20 हजार से कम का चंदा दिया है. साल 2004 में चुनाव आयोग ने इस बारे में एक प्रस्ताव बनाकर तत्कालीन सरकार के पास भेजा था लेकिन उस पर अभी तक अमल नही हुआ है.

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