मोदी की बायोपिक के बाद चुनाव आयोग ने NaMo TV पर लगाया बैन

चुनाव आयोग ने बुधवार (10 अप्रैल) को स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आधारित फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने वाला आयोग का आदेश चुनाव के दौरान ‘नमो टीवी’ के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग वाली शिकायत पर भी लागू होता है।

चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बायोपिक ‘पीएम नरेन्द्र मोदी’ के मामले में जारी आदेश का हवाला देते हुए बताया कि चुनाव आचार संहिता लागू रहने के दौरान नमो टीवी के प्रसारण पर रोक रहेगी।

उन्होंने कहा कि बायोपिक मामले के आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि, ‘‘पहले से प्रमाणित किसी भी प्रचार सामग्री से जुड़े पोस्टर या प्रचार का कोई भी माध्यम, जो किसी उम्मीदवार के बारे में चुनावी आयामों का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चित्रण करता हो, चुनाव आचार संहिता के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।’’

उल्लेखीय है कि आयोग ने मोदी की बायोपिक के प्रदर्शन को यह कहते हुए रोक दिया कि किसी भी राजनीतिक दल या राजनेता के चुनावी हितों को साधने के मकसद को पूरा करने वाली किसी फिल्म को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है। और, यही तर्क चुनाव आयोग की ओर से नमो टीवी की रोक पर भी दिया गया है।

बिना अनुमति के लांच किया गया था नमो टीवी

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ‘नमो टीवी’ को मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) की मंजूरी के बिना ही लॉन्च किया था। दस्तावेजों के मुताबिक MCMC ने नमो टीवी की लॉन्चिंग का अनुरोध रद्द कर दिया था।  बीजेपी ने MCMC से मंजूरी लेने की अपील की थी लेकिन पार्टी की इस मांग को खारिज कर दिया गया था। इस मामले की पूरी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भी भेजी गई है।

बिना अनुमति ही नमो टीवी की लॉन्चिंग करने को सीधे प्रक्रियाओं का उल्लंघन माना जा रहा है। मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी राज्य और जिला स्तर पर चुनाव आयोग की ओर से चुनावों के दौरान स्थापित की जाती है। आचार संहिता लागू होने के बाद विज्ञापनों और प्रचार आदि की मंजूरी इस संस्था की मंजूरी जरूरी होती है।

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