Friday, July 23, 2021

 

 

 

मतों की गिनती को लेकर चुनाव आयोग और केन्द्र सरकार आमने सामने

- Advertisement -
- Advertisement -

नई दिल्ली | मतों की गिनती के तरीको को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग आमने सामने आ गए है. चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा की उन्होंने हमारे द्वारा सुझाये गए एक संसोधन को करने से मना कर दिया है. दरअसल चुनाव आयोग चाहता है की मतों की गिनती के तरीके को बदल दिया जाए जबकि केंद्र सरकार इसके खिलाफ नजर आ रही है.

इसी मामले को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में आमने सामने खड़े है. मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने दलील दी की फ़िलहाल मतों की गिनती वार्ड अनुसार होती है. इसलिए प्रत्येक राजनितिक दल को पता चल जाता है की हमें किस इलाके से कितनी वोट मिली है. सत्ता में आने के बाद इस बात का डर बना रहता है की सरकार उस इलाके को निशाना बना सकती है जहाँ से उनको कम वोट मिली है.

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की और से दलील देते हुए वकील अशोक देसाई ने महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पंवार का उदहारण दिया. उन्होंने कहा की अजित पंवार ने बारामती गाँव के लोगो को पानी की सप्लाई रोकने की धमकी दे डाली थी. इसलिए वोटर की गोपनीयता रखने के लिए वार्ड अनुसार वोटो की गिनती पर रोक लगनी चाहिये. इसके लिए हमने केंद्र सरकार से संसोधन करने के लिए कहा था.

लेकिन सरकार ने यह कहते हुए उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया की मतों की गिनती का वर्तमान तरीका ज्यादा अच्छा है. सरकार की और से दलील देते हुए वकील नलिन चौहान ने कहा की वार्ड अनुसार वोटो की गिनती से हमें पता चला जाता है की हमें कहाँ ज्यादा मेहनत करने की जरुरत है और हमने कहाँ पर अच्छा प्रदर्शन किया है. दोनों और की दलीलों सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग की दलील से ज्यादा संतुष्ट दिखी. उन्होंने कहा की वो देखना चाहेगी की निजता के अधिकार के तहत केंद्र सरकार को कानून में संशोधन का निर्देश दिया जा सकता है या नहीं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles