नई दिल्ली: देश में 3.5 लाख डॉक्टरों की संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए माफी की मांग की है। जिसमे उन्होने डॉक्टरों को रिश्वत देने और एथिकल मेडिकल प्रैक्टिस करने के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईएमए ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री मोदी शीर्ष फ़ार्मा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को रिश्वत के तौर पर लड़कियां उपलब्ध कराने के अपने आरोपों को साबित करें या माफ़ी मांगें।

दिप्रिंटकी एक रिपोर्ट के अनुसार,  प्रधानमंत्री ने शीर्ष दवा कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे मेडिकल एथिक्स का सख्ती से पालन करें और महिलाओं, विदेशी यात्राओं और गैजेट्स के रूप में डॉक्टरों को रिश्वत न दें।

इस पर डॉक्टरों के शीर्ष संगठन ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री अपनी बात साबित नहीं कर पाते तो उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए। आईएमए ने कहा, मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बयान में कहा है कि शीर्ष फ़ार्मा कंपनियों ने डॉक्टरों ने रिश्वत के तौर पर लड़कियां उपलब्ध कराईं हैं।

आईएमए इस पर कड़ी आपत्ति जताता है अगर ऐसा प्रधानमंत्री ने कहा है। आईएमए ने कहा, हम जानना चाहते हैं कि क्या सरकार के पास उन कंपनियों की जानकारी थी जो डॉक्टरों को लड़कियां उपलब्ध कराती हैं, और अगर थी तो उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठक में बुलाने के बजाय आपराधिक मामला दर्ज क्यों नहीं कराया गया।

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजन शर्मा और सेक्रेटरी जनरल डॉ. आरवी असोकन के हस्ताक्षर वाली विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि पीएमओ ऐसे डॉक्टरों के नाम भी जारी करे। साथ ही राज्यों की मेडिकल काउंसिल ऐसे डॉक्टरों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करे।

अपने पत्र में आईएमए ने सरकार को ‘लोगों के स्वास्थ्य और देश की चिकित्सा शिक्षा के बारे में अनसुलझे मुद्दों से ध्यान हटाने’ के लिए भी दोषी ठहराया। आईएमए ने पत्र में कहा है, ‘यह विश्वास है कि इस तरह की क्रूड रणनीति स्वास्थ्य क्षेत्र में वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए है।’

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