चंडीगढ़ | हरियाणा और केंद्र की राजनीती में भूचाल लाने वाला जाट आन्दोलन अब भी हरियाणा सरकार की गले की हड्डी बना हुआ है. आन्दोलन के समय भड़की हिंसा से सरकार जिस तरह से निपटी , उस पर तो सवाल खड़े हुए ही है लेकिन उस दौरान महिलाओ की साथ हुई बदसलूकी पर भी सरकार का मौन रहना उनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशाना लगाता है. अब इस मामले में हाई कोर्ट से भी हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगी है.

जाट आन्दोलन के समय भड़की हिंसा में कुछ लोगो ने आरोप लगाया था की उपद्रवियों ने मुरथल में कई महिलाओं के साथ गैंगरेप किया. इस बात की पुष्टि ,घटनास्थल से मिले महिलाओ के अन्तःवस्त्र स्वयं कर रहे थे. लेकिन हरियाणा की खट्टर सरकार हमेशा से इस बात से इनकार करती आई है की मुरथल में कोई गैंगरेप हुआ था. हालांकि काफी दबाव के बाद इस मामले में एक एसआईटी का गठन किया गया था.

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मुरथल केस में हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी. गुरुवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने खट्टर सरकार को फटकार लगाते हुए कहा की मुरथल में मिले महिलाओ के अन्तःवस्त्र और गवाहों के बयान के आधार पर यह साबित होता है की वहां गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया. हरियाणा सरकार इससे इनकार नही कर सकती.

कोर्ट ने खट्टर सरकार और एसआईटी को आखिरी मौका देते हुए कहा की 28 फरवरी तक पीड़ित, आरोपी और गवाहों की पहचान करे और जाँच के कदमो की जानकारी कोर्ट को बताये. हालांकि इस मामले में अभी तक पांच लोगो को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन एसआईटी ने कोर्ट को बताया की घटनास्थल से मिले महिलाओ के अंडर गारमेंट्स पर मिले सीमेन के सैंपल , आरोपियों के सीमेन के सैंपल से मैच नही करते है इसलिए हमने आरोपियों से रेप की धारा हटाकर चालन पेश किया.

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