भारत में भुखमरी की गंभीर समस्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 119 देशों की सूची में यह 100वें पायदान पर है. पिछले वर्ष भारत इस सूची में 97वें स्थान पर था.

भारत की हालत नेपाल, उत्तर कोरिया और बांग्लादेश से भी बदतर है. इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि देश में भूख एक गंभीर समस्या है. बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. तीन सालों की अवधि के दौरान देश 45 पायदान फिसला है जो 2014 में 55वें स्थान पर था.

आईएफपीआरआई ने एक बयान में कहा, ‘119 देशों में भारत 100वें स्थान पर है और समूचे एशिया में सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान उससे पीछे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘31.4 के साथ भारत का 2017 का जीएचआई (वैश्विक भूख सूचकांक) अंक ऊंचाई की तरह है और ‘गंभीर’ श्रेणी में है.

वेल्ट हंगर हिल्फे की कंट्री डायरेक्टर (भारत) निवेदिता वार्ष्‍णेय का कहना है, ‘जीएचआई आंकड़ा गंभीर श्रेणी में है और यह स्पष्ट है कि जीडीपी की ऊंची वृद्धि दर देश में लोगों को खाद्य और पोषण सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती है.’

दक्षिण एशिया में आईएफपीआरआई के निदेशक पी के जोशी का कहना है कि देश में राष्ट्रीय पोषण केंद्रित कार्यक्रम के बावजूद सूखा और कोताही से इस साल देश में भारी संख्या में गरीब कुपोषण का सामना कर रहे हैं। वर्ष 2015-16 तक भारत में करीब 21 फीसदी बच्चे लंबाई के मुताबिक कम वजन की समस्या से जूझ रहे थे जो वर्ष 2005-2006 की तुलना में 20 फीसदी अधिक है.

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