नई दिल्ली | हमारे पडोसी देश म्यांमार में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमो पर वहां की सेना लगातार अत्याचार कर रही है. उनके घर लुटे जा रहे है, महिलाओं के साथ रेप किया जा रहा है. यही नही कई मस्जिदों को भी आग लगाई जा चुकी है. यही कारण है की म्यांमार से काफी रोहिंग्या मुस्लिम भागकर बांग्लादेश या भारत में शरण ले रहे है. अकेले भारत में ही करीब 40 हजार रोहिंग्या मुस्लिम शरण लिए हुए है. लेकिन शायद अब इन लोगो को इनके देश वापिस भेज दिया जाये.

दरअसल केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने हाल ही में बयान दिया है की भारत में रहने वाले सभी रोहिंग्या मुस्लिमो को वापिस उनके देश भेज दिया जाएगा. हालाँकि शायद ही कोई रोहिंगे मुस्लिम, जो भारत में रह रहा है, वापिस म्यांमार जाना चाहेगा. जब इस बारे में कुछ रोहिंग्या मुस्लिमो से बात की गयी तो उन्होंने कहा की भारत में हालात वहां से बहुत बेहतर है. जबकि म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमो के लिए जीवन बद से बदतर होता जा रहा है.

किरण के इस बयान को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख और मानवाधिकारो के लिए लड़ने वाले डॉ ज़फरुल इस्लाम खान ने निर्लज करार दिया. उन्होंने कहा की भारत में रहने वाला रोहिंग्या मुस्लिम, भारत की सुरक्षा के लिए खतरा नही है. ज्यादातर शरणार्थी अनपढ़ है, उनके पास पैसे भी नही है , वो कैसे सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते है. यही नही सभी शरणार्थी संयुक्त राष्ट्र के नियमो के तहत ही भारत में रह रहे है. इनमे से ज्यादतर शर्णार्थियो को UNHCR की तरफ से पहचान पत्र भी दिए गए है.

ज़फरुल ने मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा की जब भारत को संयुक्त राष्ट्र की परम्परा को निभाना ही नही है तो फिर देश में उनके ऑफिस क्यों खोले हुए है. उन्होंने आगे कहा की भारत सरकार ऐसा बयान देने की हिम्मत पाकिस्तान से आये हिन्दू या सिखों के लिये नही करेगी. ज़फरुल ने रोहिंग्या मुस्लिमो को भारत से डिपोर्ट कर म्यांमार भेजने पर कहा की अगर मोदी सरकार ऐसा करती है तो यह अंतराष्ट्रीय नियमो का उलंघन होगा. उन्होंने कहा की पहली बार किसी केन्द्रीय मंत्री ने शर्णार्थियो के लिए ऐसा बयान दिया है.

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