Wednesday, December 1, 2021

डॉ कफील का सीएम योगी से सवाल – क्या मुझे मुस्लिम होने की सज़ा दी गई ?

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बीआरडी मेडिकल कालेज में पिछले साल ऑक्सीजन सप्लाई रुक जाने से बच्चों की मौत के मामले में जमानत पर रिहा हुए डॉ कफील खान ने सीधे सीएम योगी से सवाल किया कि वे बताए मुझे क्या मुस्लिम होने की सज़ा दी गई.

बता दें कि 28 अप्रैल को इलाहबाद हाईकोर्ट ने डॉ कफील को रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि डॉ. कफील के खिलाफ मेडिकल नेग्लिजेंस या भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाता है. कोर्ट अपने आदेश में साफ लिखा है अब तक आधिकारिक रूप से कफील खान के खिलाफ मेडिकल नेग्लिजेंस का कोई सबूत सामने नहीं आया है.

कफील कहते है कि कि आठ महीने जेल में रहने के बाद वह घर वापस आये तो मेरी छोटी बेटी मुझे नहीं पहचान सकी. मैं उसका पहला जन्मदिन भी मना नहीं सका था. कफील ने घटना की रात के बारे में बताया कि जिस रात को ऑक्सीजन की आपूर्ति ख़त्म हुई तो डॉक्टरों के व्हाट्सएप समूह पर एक चेतावनी दी गई.

कफील खान छुट्टी पर थे लेकिन संदेश प्राप्त करने पर वह अस्पताल पहुंचे. उनका दावा है कि उन्होंने पैडियटिक्स महिमा मित्तल और विभाग के प्रमुख मिश्रा को बुलाया, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि स्थानीय अस्पताल और स्थानीय एजेंसी से सिलेंडरों की व्यवस्था की.

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उन्होंने बताया, 11.30 बजे से 1.30 बजे तक अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं थी जिसके चलते हर दिन 12-13 बच्चे मर रहे थे लेकिन 10 अगस्त को 30 शिशुओं की मृत्यु हो गई. मैं इनकार नहीं कर सकता कि अचानक ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद होने से इन मौतों के कारणों में से एक था.

अपने सहयोगियों के साथ, कफील खान ने 48 घंटों में 250 से अधिक सिलेंडरों की खरीद की. अंततः ऑक्सीजन टैंक 12 अगस्त की रात को पहुंचे. तब तक टेलीविजन चैनल खबर चला रहे थे और उन्हें उद्धारकर्ता के रूप में बता रहे थे. लेकिन 13 अगस्त को जब योगी आदित्यनाथ मौत के कारण का निरीक्षण करने आए, तो उन्होंने कफील खान को ही लपेट लिया.

योगी ने मुझसे कहा, ‘तुम डाक्टर कफील खान हो? तुमने सिलेंडरों को खरीदा? तुम्हें लगता है कि तुम नायक हो? मैं देखूंगा …’ उसने सोचा कि मैंने मीडिया को अस्पताल में गड़बड़ी के बारे में सूचित किया था. उस समय, मेरे लिए सब कुछ बदल गया. इससे पहले और कुछ होता मुझे खलनायक बना दिया गया.

भ्रष्टाचार के आरोप के साथ कहा गया कि वह एक निजी नर्सिंग होम चला रहे हैं और मेडिकल कॉलेज से इस नर्सिंग होम में ऑक्सीजन सिलेंडरों को ले जाया जा रहा था. वह डरते हुए 17 अगस्त को दिल्ली गए और पखवाड़े के लिए एक अज्ञात स्थान पर रहे. पुलिस ने कथित रूप से अपने परिवार को परेशान किया. पुलिस घर पर अक्सर रात में आती थी.

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