राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के दुरुपयोग को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UN Human Rights Commission) को पत्र लिखने वाले डॉक्टर कफील खान ने अब यूरोपीय संसद की मानव अधिकारों पर उपसमिति डीआरओआई को पत्र लिखा है। जिसमे उन्होने कहा कि भारत की जेलों में बंद है बहुत से बेगुनाह लोग है।

कफील खान ने अपने पत्र में कहा है कि सरकार की आलोचना करने वाले छात्र, समाजिक कार्यकर्ताओं को सरकार ने यूएपीए और एनएसए जैसी संगीन धाराओं जेल में बंद किया गया है। उन्होने कहा, भारत सरकार यूएपीए और देशद्रोह जैसी धाराओं का दुरुपयोग कर रही है।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय यूनियन के दख़ल के बाद भी जेल में बंद संजीव भट्ट, खालिद सैफी, शर्जील इमाम, मीरन हैदर, अखिल गोगोई, स्टेन स्वामी, गौतम नवलखा, प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े को रिहा नहीं किया गया है। बल्कि उमर खालिद और प्रशांत कन्नौजिया को भी गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

डॉक्टर कफील ने कहा कि भारत में हाशिये पर पड़े समाज की आवाज़ उठाना अब जुर्म जैसे हो गया है। आवाज़ उठाने वालों के खिलाफ सरकार द्वारा पुलिस बल का प्रयोग करके एनएसए तक लगा दिया जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार मानकों का उल्लंघन है।

उन्होंन ये भी लिखा है कि मथुरा जेल में सात महीने के उत्पीड़न के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। साथ ही जेल में मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कई दिनों तक भोजन और पानी नहीं दिया गया। उन्होंने लिखा है कि मथुरा जेल में सात महीने के उत्पीड़न के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।

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