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वाराणसी । इसी साल अगस्त में गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में हुई कई बच्चों की मौत के बाद प्रदेश की योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गयी थी। विपक्ष का आरोप था की योगी सरकार, प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की और ध्यान नही दे रही है। उस समय बताया गया की अस्पताल प्रशासन की और से ऑक्सिजन ख़रीद में लापरवाही बरती गयी जिसकी वजह से 65 बच्चों की मौत हो गयी।

विपक्ष और मीडिया के निशाने पर आने के बावजूद योगी सरकार ने उस घटना से कोई सबक़ नही सीखा। इसलिए प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाये अभी भी जस की तस है। अभी वाराणसी में हुई एक घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी। दरअसल यहाँ के एक सरकारी अस्पताल में एक आवारा कुत्ता, नवजात बच्ची का शव घसीटता हुआ बाहर ले गया। जैसे ही ख़बर प्रशासन को लगी वह मामले को रफ़ा दफ़ा करने में लग गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आजमगढ़ के देवरिया गांव के रहने वाले महातम यादव की पत्नी शीतला यादव (35) को प्रसव पीड़ा होने पर वाराणसी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहाँ उसने एक बच्ची को जन्म दिया लेकिन जन्म लेने के कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गयी। बताया जा रहा है की अस्पताल प्रशासन ने नवजात बच्ची के शव को शव वार्ड के फ़्लोर पर ही रख दिया।

इसलिए जब शीतला यादव और अन्य महिलाओं की आँख लग गयी तो एक आवारा कुत्ता नवजात बच्ची के शव को वहाँ से उठाकर ले गया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अन्य मरीजों के परिजनों ने कुत्ते को महिला अस्पताल के गेट से बच्ची के शव को बाहर ले जाते देखा। जब अस्पताल प्रशासन को इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने कथित रूप से महातम से यह लिखकर देने को कहा कि शव उसके कब्जे में था। चीफ मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ.अमृता अग्रवाल ने कहा, ‘डिलीवरी के बाद नवजात को परिजनों को सौंप दिया गया था। इसमें अस्पताल की कोई गलती नहीं है।’

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