Sunday, August 1, 2021

 

 

 

डॉक्टरों ने पहलू खान की बॉडी को डमी की तरह किया था ट्रीट

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कथित गौरक्षा के नाम पर राजस्थान के अलवर में पीट-पीट कर की गई पहलू खान की हत्या के मामले में शनिवार को किशोर न्याय बोर्ड ने दो नाबालिग दोषियों को 3-3 साल की सजा सुनाई। दोनों बाल सुधार गृह में रहेंगे। बोर्ड की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट सरिता धाकड़ ने सजा सुनाई।

बता दें कि हरियाणा के नूह में रहने वाले 55 वर्षीय पहलू खान की 1 अप्रैल 2017 को लोगों ने गोहत्या के शक पर राजस्थान के बेहरोर में दिल्ली-अलवर हाईवे पर बेरहमी से पीटा था। पहलू खान की दो दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई थी। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने नौ लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें तीन नाबालिग थे। इस मामले में अभी एक आरोपी का केस कोर्ट में चल रहा है।

इसी बीच बोर्ड के फैसले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जिसके अनुसार डॉक्टरों ने पहलू खान की बॉडी को डमी की तरह ट्रीट किया था।  जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट सरिता धाकड़ ने फैसले में लिखा कि “यदि मृतक पहलू खान) के शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं था तो फिर डॉक्टरों के बयान एक जैसे होने चाहिए लेकिन डॉक्टर्स ने अलग-अलग बयान दिए हैं। जिससे लगता है कि डॉक्टर्स ने पहलू खान के शरीर को डमी की तरह ट्रीट किया गया।”

फैसले के अनुसार, “पहलू खान की चोटों के बारे में मनमाने ढंग से निर्णय लिया गया और चोटों को कम से कम माना गया। डॉक्टर्स के ऐसे बयानों से उनके चिकित्सीय आचरण पर भी सवाल खड़े होते हैं।” फैसले में कहा गया है कि “कैलाश हॉस्पिटल के डॉक्टर अखिल सक्सेना, डॉ. बीडी शर्मा, डॉ. आरसी यादव और डॉ. जितेन्द्र बुटोलिया को नोटिस जारी होना चाहिए और उनसे जवाब मांगा जाना चाहिए कि मौत का कारण गंभीर चोटों के बजाय हृदयघात बताने का क्या उद्देश्य था।”

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने फैसले में कहा है कि ’21वीं सदी में, जहां भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सेक्यूलर देश है, वहां कुछ गैर-सामाजिक तत्व युवाओं को धर्म के नाम पर भड़काने और उन्हें एक अवैध ग्रुप में शामिल करने से नहीं हिचकिचाते और कानून व्यवस्था को हाथ में लेकर किसी की हत्या कर देते हैं।’

फैसले में कहा गया है कि “अगर यह मान लिया जाए कि पहलू खान और उसके बेटे अवैध रूप से गायों को जयपुर से लेकर हरियाणा जा रहे थे, तो भी किसी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।”

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