Tuesday, January 25, 2022

शीतकालीन सत्र में DMK ने बताया फातिमा लतीफ की खुद’कुशी का मामला

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IIT मद्रास की छात्रा फातिमा लतीफ ((Fathima Latifकी अज्ञात तरीके से हुई मौ’त के बाद उसके कुछ साथी भूख हड़ताल (hunger strike) पर बैठ गए हैं और वह एक निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

वहीं दूसरी और सोमवार को शीलकालीन सत्र की शुरुआत में डीएमके ने इस मामले को लोकसभा में उठाया। शून्यकाल डीएमके सांसद कनिमोझी ने लोकसभा में कहा कि फातिमा लतीफ के माता-पिता का कहना है कि जब वे उनके कमरे में गए थे, उससे पहले उसके कमरे को साफ कर दिया गया था, इस मामले में न कोई एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी को गिरफ्तार किया गया।

कनिमोझी ने कहा, “खुदकुशी करने वाली लड़की ने एक प्रोफेसर की ओर इशारा किया था, ये लोग किसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं, ये क्या हो रहा है, कितना भेदभाव किया जाएगा, अगर विद्यार्थी ही भेदभाव से तंग आकर खुदकुशी करने लगेंगे तो क्या ये सही है। आईआईटी का नाम खराब किया गया है, उच्च शिक्षा के संस्थानों जातीय और धर्म के आधार पर भेदभाव करने का स्थान नहीं बन सकते हैं।”

बता दें कि केरल (Kerala) के कोल्लम की रहने वाली फातिमा ने इस साल जुलाई में IIT मद्रास में एडमिशन लिया था।  9 नवंबर को फातिमा की बॉडी पंखे से लटकी मिली थी। फातिमा के घरवालों का आरोप है कि उसने आत्म’हत्या (Suicide) नहीं की, किसी ने उसकी ह’त्या की है।

बताया जा रहा है कि उनकी मौ’त में IIT मद्रास के ही एक प्रोफेसर (Professor) का हाथ हो सकता है जिस पर धार्मिक भेद-भाव के आरोप भी लगते रहे हैं। दरअसल, फातिमा के फोन में एक नोट मिला था जिसमें ह्यूमैनिटीज (Humanities) और सोशल साइंस (Social science) के प्रोफेसर को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

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