सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया हैं कि अगर किसी शख्स का अपनी पत्नी से ‘बेवफाई’ के आधार पर तलाक होता हैं. यानि वह पत्नी की बेवफाई के कारण तलाक लेता हैं तो भी उसे पत्नी को गुजारा भत्ता देना होगा. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट से तलाक मिलने से पहले पति से अलग रहने वाली अवधि के लिए महिला गुजारा खर्च का दावा नहीं कर सकती.

शीर्ष अदालत ने अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 पर सुनवाई के दौरान टिपण्णी करते हुए कहा, पति को त्यागने के आधार पर तलाक वाली महिला अपने पति से उस अवधि के लिए गुजारे भत्ते का दावा नहीं कर सकती, जब वह अदालत द्वारा तलाक मंजूर होने से पहले अलग रह रही थी. उसे पति से गुजारा खर्च केवल उसी स्थिति में मिलेगा जब कानूनन दोनों का तलाक हो गया हो.

धारा 125 की उप-धारा (4) में कहा गया है कि कोई महिला तब तक गुजारा खर्च का दावा नहीं कर सकती जब वह ‘व्यभिचार’ में अलग रह रही हो या पर्याप्त कारण के बिना ही अपने पति से अलग रह रही हो या फिर पति-पत्नी दोनों ने आपसी सहमति से अलग रहने का फैसला लिया हो.

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अदालत हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई कर रही थी. उच्च न्यायालय ने सत्र अदालत के महिला को 3 हजार रुपए प्रतिमाह का गुजारा भत्ता मंजूर करने के आदेश को बरकरार रखा था.

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