ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (महिला) की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ असमा जोहरा ने तीन तलाक को सामाजिक मुददा करार देते हुए इसकों धार्मिक रंग देने पर आलोचना की हैं.

बोर्ड की पांचवीं सालाना बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, बेवजह पिछले ढाई साल से तलाक के जरिए मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा हैं. जबकि तलाक के मामले सबसे अधिक हिन्दू समुदाय में हैं. उन्होंने कहा, तलाक को शरियत के मुताबिक देखा जाना चाहिए. पिछले ढाई वर्षों से इस मुुद्दे को बिना वजह तूल दिया जा रहा है.

जोहरा ने कहा कि तीन तलाक का मतलब है, उस पुरूष से दोबारा शादी नहीं हो सकती. इस सही तरीके से समझने की जरूरत है. इस्लाम में महिला सुरक्षित है. उन्हें पूरी सुरक्षा दी गयी है. सरकार जानबूझकर इस मुद्दे को हवा दे रही है. सच्चर कमेटी में तीन तलाक का जिक्र तक नहीं है.

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26 परिवार अदालतों से मांगी गयी सूचना के आधार पर जोहरा ने बताया कि ठ जिलों कन्नूर, नासिक, करीमनगर, गुंटुर, सिकंदराबाद, मल्लापुरम, अन्नाकुर्रम और एक अन्य जिले के आंकडे़ के अनुसार तलाक लेने वाले सबसे अधिक 16,505 हिन्दू, 1307 मुस्लिम, 4,827 ईसाई और आठ सिख समुदाय से है. यह आंकडे़ वर्ष 2011 से 2015 की है.

उन्होंन्र कहा कि दुनिया में इस्लाम ही ऐसा मजहब है जो महिलाओं की सम्पति मेंं अधिकार की बात करता है. यह लैंगिग समानता की सबसे बड़ी मिसाल है. अगर इसे सहीं ढंग से लागू किया जाये तो महिलाओं की बेहतरी की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा.

उन्होंने कहा कि लैंगिग समानता और लैंगिग न्याय हासिल करने के लिए कुरानिक ज्यूरिपूडेंस (इस्लामिक न्याय शास्त्र) को भारतीय कानून का हिस्सा बनाया जाना चाहिए.

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