मथुरा की जिला अदालत ने कृष्ण जन्मभूमि के स्वामित्व को लेकर दाखिल की गई याचिका स्वीकार कर ली है। इससे पहले मथुरा की सिविल अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी थी। इस याचिका में शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई। मामले की 18 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।

सिविल जज, मथुरा के सामने दायर मुकदमों में, वादी ने कहा कि “हर इंच भूमि”, 13.37 एकड़ को मापने, “कटरा केशव देव (जैसा कि स्थान ऐतिहासिक रूप से ज्ञात है) भगवान श्रीकृष्ण और (क) हिंदू समुदाय के भक्तों के लिए पवित्र है।” याचिकाकर्ताओं ने सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ऑफ वक्फ की सहमति से कथित ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह की प्रबंधन समिति द्वारा इस पर “अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण और अधिरचना को हटाने” की मांग की थी। हालांकि, 2 अक्टूबर को, मथुरा में सिविल कोर्ट ने मुकदमा खारिज कर दिया था।

कोर्ट ने कहा कि 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्शिप ऐक्ट के तहत सभी धर्मस्थलों की स्थिति 15 अगस्त 1947 वाली रखी जानी है इस कानून में सिर्फ अयोध्या मामले को अपवाद रखा गया था। कोर्ट ने कहा इस याचिका पर सुनवाई के लिए स्वीकार करने के पर्याप्त आधार नहीं हैं। ऐसे में इसे तत्काल प्रभाव से खारिज किया जा रहा है।

इस मामले में अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने 17वीं सदी की मस्जिद को हटाने के लिए कुछ लोगों द्वारा कोर्ट में याचिका दाखिल करने पर उनकी आलोचना की। पुजारियों ने कहा कि ऐसे मुद्दे उठाकर कुछ लोग मथुरा के शांति-सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 20वीं सदी में हुए समझौते के बाद श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर मथुरा में कई विवाद नहीं है।

अक्टूबर 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह सोसाइटी के बीच जमीन का ट्रस्ट होने पर समझौता हुआ था। इस समझौते पर दोनों पक्ष पूरी तरह से कायम है।

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