अयोध्या केस में बोले धवन – सिर्फ मुस्लिम पक्ष से हो रहे सवाल, हिन्दू पक्ष से कोई सवाल नहीं

5:44 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में अयोध्या केस की आखिरी दौर की सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के लिए 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करने की अंतिम समयसीमा तय की है।

इसी बीच वकील राजीव धवन ने  बेंच के समक्ष दलील पेश कर कहा कि यह विचित्र बात है कि सिर्फ मुस्लिम पक्षकारों से ही सवाल पूछे जा रहे हैं। हिंदू पक्ष से कोई सवाल नहीं किया जा रहा।

धवन ने आगे कहा कि पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में किसी मंदिर के ध्वस्त करने की बात नहीं कही गई है। धवन ने कहा कि ताला खुलने के बाद भी हिंदुओं का वहां पर कब्ज़ा नहीं रहा है। हिंदुओं के पास सिर्फ पूजा का अधिकार रहा है।

धवन ने दलील देते हुए कहा, ‘पुरातत्व एक विज्ञान है। यह कोई विचार नहीं है। पुरातत्व विभाग की यह टिप्‍पणी सबूत के तौर पर कोर्ट ने स्वीकार किया, उसे कोर्ट द्वारा परखा जाना और एएसआई द्वारा उसकी सत्यता साबित किया जाना जरूरी है। इसे मुस्लिम पक्षकारों ने नकारा है।’

धवन ने आगे कहा, ‘यहां किस्से कहानियों के ज़रिए अपना दावा किया जा रहा है। मैं किसी यात्री की डायरी या श्रद्धा या विश्वास की बात नहीं करूंगा। मैं सीधे शब्दों में कहूंगा कि विवादित स्थल पर हिंदुओं का कभी कोई एब्सोल्यूट और एक्सक्लुसिव कब्ज़ा नहीं था। उनको बाहर सिर्फ पूजा का अधिकार था। किसी ने भी आज तक ये नहीं माना कि हिंदुओं का आंतरिक अहाते पर कब्ज़ा था।’

मुस्लिम पक्ष के वकील धवन ने आगे कहा, ‘विवादित ज़मीन पर लगातार हमारा कब्जा रहा है। हिंदू पक्ष ने बहुत देर से दावा किया। वर्ष 1989 से पहले हिंदू पक्ष ने कभी ज़मीन पर मालिकाना दावा पेश नहीं किया। साल 1986 में राम चबूतरे पर मंदिर बनाने की महंत धर्मदास की मांग को फैज़ाबाद कोर्ट खारिज कर चुका है।’

इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने राजीव धवन से हिंदुओं के बाहरी अहाते पर कब्ज़े के बारे में पूछा। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि 1858 के बाद के दस्तावेजों से पता चलता है कि राम चबूतरा की स्थापना की गई थी, उनके पास अधिकार था।
धवन ने कहा कि 1885 से 1989 तक हिंदू पक्षकारों ने तो स्वामित्व का अधिकार ही नहीं मांगा, जबकि हमको सरकारी ग्रांट मिला. इससे यह साबित होता है कि हमारा अधिकार था। लेकिन, मस्जिद पर अवैध कब्जा किया गया और उसके बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं कि गई।
धवन ने अवैध कब्जे पर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया। धवन ने कहा कि परंपरा और आस्था कोई दिमाग का खेल नहीं है। इन्हें अपने मुताबिक नहीं ढाला जा सकता है। राजीव धवन ने कहा कि अब तक जिन फैसलों का हिंदू पक्ष ने हवाला दिया है उनमें से अधिकांश में तथ्य सही नहीं थे।
मुस्लिम पक्षकार ने शीर्ष अदालत में कहा कि गुंबद के नीचे राम का जन्म होने और श्रद्धालुओं के वहीं फूल प्रसाद चढ़ाने का कोई भी दावा सिद्ध नहीं किया गया है। यहां गुंबद के नीचे तो ट्रेसपासिंग (अनाधिकृत प्रवेश) कर लोग घुस आए थे। जब वहां पूजा चल रही थी तो अंदर घुसने का मतलब क्या है? इसका मतलब पूजा बाहर ही हो रही थी। कभी भी मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई, वहां लगातार नमाज़ होती रही थी।
News18 इनपुट के साथ…
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