महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर चलेगा केस, सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेन्द्र फडणवीस की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। अब फडणवीस पर चुनावी हलफनामे में जानकारी छुपाने के आरोप में मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने 2019 के अपने फैसले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया है।

फड़णवीस पर 2014 के चुनावी हलफनामे में कथित रूप से अपने खिलाफ लंबित दो आपरा*धिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप है। ये मुकदमे नागपुर (Nagpur) के हैं, जिनमें एक मानहानि और दूसरा ठगी का है। याचिका में फडणवीस को अयोग्य करार देने की मांग की गई थी।

वकील सतीश उके ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि 2014 के चुनाव का नामांकन दाखिल करते समय में फडणवीस ने झूठा हलफनामा दायर किया था. याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने खिलाफ दो आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाई थी।

कुछ ही दिन पहले इस मामले में देवेंद्र फडणवीस को ट्रायल कोर्ट से जमानत मिली थी। तब देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि यह दोनों केस 1993-98 के बीच के हैं। उन्होंने कहा था कि हमने एक झुग्गी झोपड़ी को बचाने के लिए आंदोलन किया था। इस दौरान मेरे उपर दो केस हुए थे। वह सेटल भी हो गए थे।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष फडणवीस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा था कि चुनाव लड़ने वाले अन्य उम्मीदवारों के लिए इस मुद्दे के दूरगामी परिणाम होंगे और न्यायालय को एक अक्टूबर 2019 के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

न्यायालय ने पिछले साल अपने फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में फडणवीस को क्लीन चिट दे दी थी और कहा था कि वह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) के तहत कथित अपराध पर मुकदमें का सामना करने के हकदार नहीं हैं।

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