आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार की एंट्री को लेकर बवाल, देवबंद उलेमाओं ने साधी चुप्पी

11:04 am Published by:-Hindi News

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार के गुरुवार को तबलीगी जमात की सबसी बड़ी संस्था दारुल उलूम देवबंद के दौरे को लेकर विवाद मचा गया है। दरअसल, इस दौरे के सामने आने के बाद कथित तौर पर आरएसएस और देवबंद में सौदेबाजी के आरोप सामने आ रहे है।

इतना ही नहीं इस दौरे ने मौलाना वास्तानवी के मामले को भी हवा दे दी है। मौलाना वास्तानवी दारूल उलूम के पूर्व वाइस चांसलर (मोहतमिम) रहे हैं। वास्तानवी पर पीएम नरेन्द्र मोदी की तारीफ करने के आरोप लगे थे। हालांकि इंद्रेश कुमार 2004 में भी दारुल उलूम आ चुके हैं। इंद्रेश कुमार ने संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात के बाद कहा कि यह उनकी शिष्टाचार मुलाकात है और वह यहां भाईचारे का पैगाम लेकर आए हैं।

लेकिन अब दारूल उलूम के दो धड़ों में भी इस मुलाकात को लेकर खामोशी छाई हुई है। वहीं इन चर्चाओं के बीच दारूल उलूम के मोहतमिम ने इस मुलाकात को लेकर अपनी ओर से एक बयान भी जारी किया है। इस मामले में मौलाना वास्तानवी ने कहा कि “मैं इस बारे में क्या कह सकता हूं। इस मामले पर मेरे से सवाल करने से अच्छा है कि मुलाकात करने वालों से पूछा जाए। सवाल उनसे किया जाए जिन्होंने इंद्रेश कुमार को रिसेप्शन दिया।”

वहीं राज्यसभा के पूर्व सांसद और एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद अदीब का कहना है, “मैं खुद भी देवबंद से जुड़ा रहा हूं. मुझे बड़ा अफसोस हुआ है। अगर इंद्रेश कुमार से मिलना जरूरी ही था तो मोहतमिम को एक सवाल भी करना चाहिए था कि देश में आज मुसलमान का ये हाल क्यों है। जय श्रीराम न बोलने पर कार चढ़ा दी जाती है। कभी दाढ़ी काट दी जाती है। टोपी पहनने के लिए मना किया जाता है। उनसे सवाल-जवाब भी होने चाहिए थे।

उन्होने कहा, दारूल उलूम की तो वो तारीख रही है कि उलेमाओं ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़कर देश को आज़ाद कराया है। लेकिन मोहतमिम और इंद्रेश कुमार की मुलाकात के फोटो तो कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। रहा सवाल महमूद मदनी का तो वो कुछ सोच-समझकर इस मामले में खामोश हैं।

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