नई दिल्ली। महबूबा मुफ्ती की रिहाई से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि किसी को हमेशा के लिए हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू- कश्मीर प्रशासन से पूछा कि महबूबा को कब तक हिरासत में रखा जा सकता है?

इल्तिजा मुफ्ती की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से कहा कि प्रथमदृष्टया ऐसा लगता है कि प्रशासन ने हिरासत में रखने की अधिकतम सीमा को पार कर दिया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस एस. के. कॉल और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती से राजनीतिक नेताओं को मिलने के लिए सामान्य अनुमति नहीं दी जा सकती है, लेकिन वह संबंधित अधिकारियों को आवेदन कर सकते हैं।

कोर्ट ने केंद्र से एक हफ्ते में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत हमेशा के लिए नहीं हो सकती है। बता दें कि महबूबा मुफ्ती को पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 107 के तहत हिरासत में लिया गया था और इसके छह महीने पूरे होने पर फरवरी में उन पर जन सुरक्षा कानून (PSA) लगा दिया गया।

अपनी याचिका में इल्तिजा ने कोर्ट को बताया कि जेल में कैद मुफ्ती को उनसे नहीं मिलने दिया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने इल्तिजा और उसके भाई को हिरासत में महबूबा से मिलने की अनुमति दी है। कोर्ट ने कहा कि किसी को हमेशा हिरासत में नहीं रखा जा सकता और कोई बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए।

मामले की सुनवाई में सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार के हलफनामा दाखिल करने की जानकारी देते हुए कहा कि मुफ्ती को इसलिए हिरासत में रखा गया है क्योंकि उनका व्यवहार कानून व्यवस्था की समस्या पैदा कर सकता है।

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