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कानपुर | नोट बंदी के बाद सरकार ने पुराने नोटों को बैंक में जमा करने का आदेश दिया. निकासी के लिए नियम बनाया गया की केवल 24 हजार रूपए प्रति हफ्ते निकाले जा सकेंगे. इस नियम के बावजूद देश भर में नए नोटों के करोडो के बण्डल रोज पकडे गए. आयकर विभाग द्वारा देश भर में मारे गए छापे में करीब 80 करोड़ रूपए के नए नोट जब्त किये गए.

सवाल उठा की आखिर निकासी की सीमा तय होने के बाद भी लोगो के पास इतने नए नोट कैसे पहुंचे. यही से बैंक कर्मचारियों पर शक होना शुरू हुआ. और यह सच भी साबित हुआ. एक्सिस बैंक के कई मेनेजर आयकर विभाग की चपेट में आये. आज कानपुर से आई एक और खबर ने इसकी पुष्टि की. यहाँ एक उपभोक्ता ने बैंक कर्मी पर आरोप लगाया की उसने 100-100 के नोट जमा करने के बावजूद मेरे खाते में 500 के पुराने नोटों की एंट्री की.

पटेल नगर के रहने वाले योगेंद्र स्वर्णकार 21 नवम्बर को उरई के स्टेट बैंक में पैसे जमा करने पहुंचे. योगेन्द्र के अनुसार उसने 40 हजार रूपए बैंक में जमा कराये. सभी पैसे 10,20,100 और 2000 के नोटों के रूप में थे. इसकी रसीद मुझे दी गयी. मैंने 100 रूपए के 100 नोट और 2000 के 13 नोट जमा किये. लेकिन बैंक कर्मी ने मेरे खाते में वैध नोटों की जगह पुराने 500 रूपए के 75 नोटों की एंट्री कर दी.

योगेन्द्र ने बताया की बैंक कर्मी ने जमा किये गए पैसे में से 36 हजार रूपए एक अन्य बैंक कर्मी को दिए और बाकी काउंटर में रख दिए. मैं इसकी शिकायत बैंक मेनेजर से की तो उन्होंने गोलमोल जवाब देकर वहां से जान को कहा. मैंने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय से की. खबर है की प्रधानमन्त्री कार्यालय ने स्टेट बैंक मेनेजर को पत्र लिखकर जवाब माँगा है.

प्रधानमंत्री कार्यलय से पत्र आते ही स्टेट बैंक में हडकंप मच गया. स्टेट बैंक ने आनन् फानन में उक्त बैंक कर्मी का ट्रान्सफर एक अन्य ब्रांच में कर दिया. यही नही इसकी खबर योग्नेद्र को भी दी गयी. यही नही स्टेट बैंक मेनेजर ने बताया की इस मामले में जांच कमिटी बैठा दी गयी है.


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