मुस्लिम विरोधी हिंसा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में आज फिर से सुनवाई हुई। ये सुनवाई केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को न्यायमूर्ति एस मुरलीधर को दिल्ली हाई कोर्ट से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में स्थानांतरित किए जाने के बाद हुई। जिसमे कोर्ट ने भाषणों (हेट स्पीच) के खिलाफ की गई कार्रवाई पर जानकारी देने के लिए गुरुवार को केंद्र सरकार को एक महीने समय दिया है।

हालांकि एक दिन पहले, न्यायमूर्ति एस मुरलीधर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने दिल्ली पुलिस से कहा था कि हेट स्पीच के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में देरी नहीं होनी चाहिए। पीठ ने चारों बीजेपी नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, अभय वर्मा और प्रवेश वर्मा के भाषण के वीडियो भी कोर्ट में चलवाए थे। कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर उसे फटकार लगाते हुए कहा था कि हम 1984 जैसे हालात फिर से बनने की अनुमति नहीं देंगे।

हालांकि अब केंद्र और दिल्ली पुलिस के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कल कोर्ट ने आदेश जारी कर जवाब मांगा था कि जो भड़काऊ बयान दिए गए थे उनपर करवाई की जाए, जबकि ये बयान 1-2 महीने पहले दी गई। याचिकाकर्ता केवल तीन भड़काऊ बयानों को चुनकर कार्रवाई की मांग नहीं कर सकता। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमारे पास इन तीन हेट स्पीच के अलावा कई और हेट स्पीच है, जिसको लेकर शिकायत दर्ज कराई गई।

याचिकाकर्ता ने चुनिंदा सिर्फ तीन वीडियो का हवाला दिया है। एक जनहित याचिका में ऐसा नहीं होता। केंद्र को पक्षकार बनाया जाए या नहीं ये कोर्ट को तय करना है, याचिकाकर्ता को नहीं। हम हिंसा को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। केंद्र की इस दलील पर याचिकाकर्ता की ओर से बोले वकील कोलिन गोंजाल्विश ने कहा कि सबसे पहले आज ही सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हों, फिर फटाफट गिरफ्तारी भी हो।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाधीश सी हरिशंकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केंद्र को भड़काऊ भाषणों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर जानकारी देने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल होगी।

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