नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे मामलों के कुछ आरोपियों का केस लड़ रहे वकील और एक्टिविस्ट महमूद प्राचा (Activist Mahmood Pracha) के खिलाफ दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने सरकारी काम मे बाधा पहुंचाने और ड्यूटी के दौरान अफसरों से दुर्व्यवहार करने के मामले में एफ़आईआर दर्ज की है। उनके खिलाफ  IPC की धारा 186 और IPC 353 के तहत निजामुद्दीन थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

बता दें कि स्पेशल सेल कोर्ट के आदेश पर दिल्ली पुलिस महमूद प्राचा के दफ्तर पर तलाशी लेने गई थी, उसी दौरान महमूद पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और ड्यूटी के दौरान अफसरों से दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा। हालांकि दिल्ली की एक अदालत ने प्राचा के ऑफिस में तलाशी के संबंध में दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी है।

पांच जनवरी तक स्थिति रिपोर्ट मांगने के अलावा, अदालत ने मामले के जांच अधिकारी को प्राचा के कार्यालय परिसर में उनके द्वारा ली गई किसी तलाशी की पूरी वीडियो फुटेज के साथ सुनवाई की अगली तारीख 27 दिसंबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।

अधिवक्ता ने कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) ने उनके खिलाफ एक झूठा मामला दर्ज करने के बारे में धमकी दी। प्राचा ने अदालत को बताया कि 24 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से लेकर 25 दिसंबर को तड़के लगभग 03:00 बजे तक उनके कार्यालय में तलाशी ली गई और कानून के अनुसार जांच अधिकारी को संबंधित मजिस्ट्रेट को तलाशी और जब्त की गई सामग्री के बारे में बताना चाहिए जिसके बाद अदालत ने यह निर्देश दिया।

वहीं दंगा पीड़ितों के एक समूह ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि उन पर अपनी शिकायतें वापस लेने और उनकी मदद करने वाले एक अधिवक्ता के खिलाफ बयान देने का दबाव बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस साल फरवरी में हुए दंगों के बाद जब किसी भी सरकार या कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उन्हें सहायता प्रदान नहीं की तो प्राचा ने उनके साथ खड़े होकर कानूनी सहायता और अन्य संभावित सहायता नि:शुल्क प्रदान की।

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