नई दिल्ली | दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है. केजरीवाल सरकार ने काफी हद तक सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के स्तर पर ला दिया है. जितने भी नई सरकारी स्कूल बनकर तैयार हो रहे है उनका इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी लिहाज से नीजी स्कूलों से कम नही है. यही कारण है की अब दिल्ली के ज्यादातर बच्चे निजी की जगह सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दे रहे है.

इन सबके अलावा केजरीवाल सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर भी काफी हद तक नियंत्रण किया है. पिछले दो सालो में किसी भी निजी स्कूल को फीस बढाने की अनुमति नही दी गयी है. इसी क्रम में दिल्ली सरकार एक और कड़ा कदम उठाने जा रही है. केजरीवाल सरकार ने उन सभी स्कूलों को टेकओवर करने की तैयारी शुरू कर दी है जो परिजनों को बढ़ी हुई फीस वापिस नही कर रहे है.

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दरअसल दिल्ली के करीब 554 निजी स्कूलों पर फीस बढाने का आरोप था. दिल्ली सरकार के आदेश के बाद सभी स्कूलों को फीस वापिस लौटाने का आदेश दिया गया था. लेकिन निजी स्कूल प्रशासन, सरकार के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट चला गया. बाद में हाई कोर्ट ने मामले में जस्टिस अनिल दवे की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन किया. कमिटी ने स्कूलों को 9 फीसदी के ब्याज से बढ़ी फीस परिजनों को वापिस लौटने की सिफारिश की.

कमिटी की सिफारिश के बाद करीब 105 स्कूलों ने बढ़ी फीस वापिस लौटा दी. लेकिन 449 स्कूलों ने पैसा वापिस नही किया. अब इस मामले में दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में सभी 449 स्कूलों को टेकओवर करने का प्रस्ताव दिया है. इनमे दिल्ली पब्लिक स्कूल मथुरा रोड, स्प्रिंग डेल, अमिटी इंटरनेशनल साकेत, संस्कृति स्कूल, मॉडर्न पब्लिक स्कूल जैसे स्कूल भी शामिल हैं. मामले में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा की किसी भी स्कूल को मनमाने तरीके से फीस नही बढाने दी जाएगी. ऐसे स्कूलों पर हम सख्त कार्यवाही करेंगे.

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