नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की छात्रों ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुआ बुधवार को कहा कि सोमवार को जब वे संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ संसद तक मार्च करने की कोशिश कर रहे थे तब पुलिस ने छात्राओं के गुप्तां’गों पर लात मारी, कपड़े और हिजाब फाड़ दिए एवं गालियां दीं।

Police Hit us, Tore off our Clothes: Jamia Student Abu Darda Recalls Feb 10 Incident

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India Tomorrow English ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ಫೆಬ್ರವರಿ 12, 2020

जामिया के जेसीसी ऑफिस में बुधवार को प्रेस वार्ता कर छात्राओं ने आरोप लगाया लगाया कि उनके निजी अंगों पर हमले किए गए। छात्र-छात्राओं ने बताया कि कई छात्र-छात्राओं के हाथ-पैरों में फ्रेक्चर हुआ है। छात्रा चंदा यादव का कहना है कि इस दफा पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए नयाब तरीका तलाशा था। पुलिस वाले अत्याधुनिक ड्रेस व हथियारों से लैस थे। यह पुलिस वाले बैरिकेड के आगे खड़े हो गए, जैसे ही छात्र शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे तभी उनमें से कुछ पुलिस वालों ने कपड़ों में लैस हथियारों से हमला कर दिया। अपनी करतूत को छिपाने के लिए पुलिस ने महिला पुलिसवालों का एक घेरा बना रखा था।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय के द्वार संख्या सात से दोपहर में संसद के लिए मार्च शुरू किया था। छात्र-छात्राओं ने बताया कि पुलिस की इस बर्बरता की चपेट में आकर कई छात्र-छात्राएं गंभीर रूप से चोटिल हो गए, जिन्हें जामिया के अस्पताल ले जाया गया। यहां छात्रों की हालत देखकर उन्हें पास के अलशफा अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने भी छात्रों के गंभीर रूप से चोटिल होने की पुष्टि की है। प्रेस कांफ्रेंस में कई ऐसे छात्र-छात्राएं मौजूद थे जिन्हें गंभीर चोटें आई हैं।

जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी का आरोप है कि जो छात्र सीएए-एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे उनके परिवारवालों को पुलिस झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दे रही है। छात्रों का दावा है कि पुलिस उन पर गलत आरोप लगाकर प्रदर्शन खत्म करने की धमकी देती है। पुलिस दावा करती है कि जेसीसी की बैठक की हर जानकारी उनके पास है।

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