मानसून सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध को लेकर जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने कहा, भारत और चीन सीमा मुद्दा अभी हल नहीं हुआ है। चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जमावड़ा किया है। उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से भी जवाबी तैनाती की गई है।

उन्‍होंने भारतीय सेना के शौर्य की तारीफ करते हुए कहा कि हम अपनी सीमा की सुरक्षा में सफल रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि इस तनावभरे माहौल में ‘हमारे बहादुर जवानों ने जहां संयम की जरूरत थी वहां संयम रखा तथा जहां शौर्य की जरुरत थी, वहां शौर्य प्रदर्शित किया।’ हालांकि, दोनों दी देश चाहते हैं कि सीमा पर तनाव कम किया जाए और शांति बहाल की जाए। लद्दाख में हम एक चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं और हमें प्रस्ताव पारित करना चाहिए कि पूरा सदन जवानों के साथ खड़ा है।

रक्षा मंत्री ने कहा, यह सदन अवगत है चाईना, भारत की लगभग 38,000 स्क्वायर किलोमीटर भूमि का अनधिकृत कब्जा लद्दाख में किए हुए है। इसके अलावा, 1963 में एक तथाकथित बाउंडरी एग्रीमेंट के तहत, पाकिस्तान ने PoK की 5180 स्क्वायर किलोमीटर भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन को सौंप दी थी। उन्‍होंने कहा, अप्रैल माह से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन की सेनाओं की संख्या तथा उनके हथ‍ियारों में इजाफा देखा गया।

उन्‍होंने कहा, “अभी की स्थिति के अनुसार, चीनी पक्ष ने एलएसी और अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिक टुकड़ियां और गोला-बारूद मोबलाइज किआ हुआ है। पूर्वी लद्दाख और गोगरा, कोंगका ला और पैंगोंग झील के उत्‍तरी और दक्षिणी किनारे पर तनाव वाले कई इलाके हैं। चीन की कार्रवाई के जवाब में हमारी सेना ने भी भी इन क्षेत्रों में उपयुक्त काउंटर तैनाती की है ताकि भारत के सुरक्षा हित पूरी तरह सुरक्षित रहें। अभी जो स्थिति बनी हुई है उसमें संवेदनशील ऑपरेशन मुद्दे शामिल है इसलिए मैं इस बारे में ज्यादा ब्यौरा का खुलासा नहीं करना चाहूंगा।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि एलएसी का सम्मान करना और उसका कड़ाई से पालन किया जाना सीमा क्षेत्रों में शांति और सद्भाव का आधार है. 1993 और 1996 के समझौते में इसे साफ तौर पर स्वीकार किया गया है। हमारी सेना इसका पूरी तरह से पालन करती हैं. चीन की तरफ से ऐसा नहीं हुआ है।

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