नई दिल्ली | मंगलवार को तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने जहाँ मुस्लिम महिलाओं को एक नई उर्जा दी वही कुछ मुस्लिम संगठन इस फैसले से नाखुश दिखे. तीन तलाक को इस मुकाम तक पहुँचाने में जिस मुस्लिम महिला का सबसे अहम् रोल रहा , वो है मामले की मुख्य याचिकाकर्ता शायरा बनो. उत्तराखंड की रहने वाली शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ख़ुशी जताते हुए कहा की हम इस फैसले का स्वागत और समर्थन करते है. आज का दिन मुस्लिम महिलाओं के लिए एतिहासिक दिन है.

हालाँकि कई मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले पर नाखुशी जाहिर की. देवबंद स्थित मुस्लिम शिक्षण संसथान , दारुल उलूम ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा की तीन तलाक , कुरान और हदीस से जुड़ा हुआ है. इसलिए शरियत में किसी भी तरह की दखलंदाजी बर्दास्त नही की जायेगी. इस मामले में मुस्लिम पर्सनल बोर्ड जो भी फैसला लेगा हम उसके साथ रहेंगे. कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया मेरठ के शहर काजी की तरफ से भी आई.

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शहर काजी प्रोफेसर जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी ने कहा की संसद में जो भी कानून बने वह कुरान और हदीस की रौशनी में होना चाहिए. इससे अलग कोई कानून नही बनना चाहिए. यह अब देश के सभी उलेमाओ की जद्दोजहद रहेगी. उधर मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा की हमें सभी पहुलुओ पर सोचना होगा. मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के जफ़र जिलानी ने कहा की उन औरतो का क्या होगा जो इस फैसले में बाद भी तलाक स्वीकार करेगी.

जफ़र ने आगे कहा की हमने पहले भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान किया है और इस फैसले पर भी विचार किया जाएगा. वही बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा की अब सरकार को यूनिफार्म सिविल कोड को लाना चाहिए. उधर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद का कहना है की हमने जैसा सोचा था वैसा ही फैसला आया है. यह अच्छा फैसला है. यह सच्चाई, वास्तविककता और सही इस्लाम को उजागर करता है.

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