सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद के मामलें में दोनों पक्षकारों को दी गई आपसी सहमति से विवाद को सुलझाने की सलाह पर दारुल उलूम देवबंद ने भी अब समझोते के लिए बातचीत को बेमतलब बताया हैं.

दारुल उलूम की और से कहा गया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को ही इस मसले पर निर्णय लेने का अधिकार है. इस मसले पर समझौते की बातचीत का कोई औचित्य नहीं रह गया है. सुप्रीम कोर्ट को अपना फैसला सुना देना चाहिए. दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि देश का मुसलमान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ है. इसलिए जब तक बोर्ड का कोई निर्णय नहीं आ जाता, सभी को खामोशी से इंतजार करना चाहिए.

वहीँ जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि पहले भी बातचीत के जरिए समझौते की बात कई बार आ चुकी है, लेकिन कभी कोई हल नहीं निकला उन्होंने कहा कि समझौते से कोई हल नहीं निकलेगा. सुप्रीम कोर्ट को इस मसले पर अपना फैसला देना चाहिए. दोनों पक्षों को फैसला मानना पड़ेगा.

याद रहे 21 मार्च को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजीआई) ने कहा कि दोनों पक्ष इस मामले को कोर्ट के बाहर सुलझा लें तो ठीक रहेगा. उन्होंने कहा, यह धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है इसलिए इसको कोर्ट के बाहर सुलझा लेना चाहिए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि अगर दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफल नहीं होती है तो फिर सुप्रीम कोर्ट दखल देगा.

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