केंद्र की मोदी सरकार शीतकालीन सत्र में तीन तलाक को लेकर कानून लाने जा रही है. ऐसे में अब सुन्नी उलेमाओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कानून लाने से पहले सुन्नी हनफ़ी औलमा के भी सुझाव लिए जाए.

ईद मिलादुन्नबी के मौके पर एक कार्यक्रम में दरगाह आला हज़रत के प्रवक्ता मुफ़्ती मुहम्मद सलीम नूरी ने कहा कि 3 तलाक़ पर नया कानून बनाने के लिए केंद्रीय हुकूमत ने जो ड्राफ्ट तैयार किया है उस पर सुन्नी हनफ़ी केंद्रों के बड़े आलिम से ज़रूर राय ली जाए ताकि ये कानून शरीयत के खिलाफ भी ना हो और महिलाओं को राहत भी मिले.

ध्यान रहे शायरा बानो मामले में सुनवाई करते हुए 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को एक साथ देने पर बैन लगा दिया था. शायरा बानो मामले में सुनवाई करते हुए 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को एक साथ देने पर बैन लगा दिया था.

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हालांकि इस मामले में मुस्लिम संगठनों का ये भी कहना है कि गुजरात चुनाव में फायदा उठाने के लिए मोदी सरकार ये कदम उठा रही है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने सवाल उठाया कि तीन तलाक पर सुनवाई के बाद मोदी सरकार ने कानून बनाने की जरूरत से इनकार किया था. लेकिन अब कानून बनाने की बात कही जा रही है.

इसी तरह ‘ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत’ के अध्यक्ष नावेद हामिद पहले ही केंद्र के इस कदम को राजनीतिक स्टंट करार दे चुके है.