सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में जहांपनाह जंगल में संत रविदास का मंदिर तोड़ जाने को लेकर आज दलित समुदाय के लोगों ने हाथों में नीले रंग के झंडे लेकर झंडेवालान से रामलीला मैदान तक बुधवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से दोबारा मंदिर बनाने की मांग की।

ये प्रदर्शन ऐसे समय में किया गया जब सुप्रीम कोर्ट ने इसे राजनीतिक रंग न देने की हिदायत दी थी। 19 अगस्त, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज अरुण मिश्रा और एमआर शाह की पीठ ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि इस मुद्दे पर राजनीतिक रूप से या प्रदर्शनों के दौरान कानून व्यवस्था संबंधी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। पीठ ने कहा था कि हर चीज राजनीतिक नहीं हो सकती। धरती पर किसी के भी द्वारा हमारे आदेश को राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता।

लेकिन बुधवार को रामलीला मैदान से भीड़ तुगलकाबाद के लिए निकली तो रास्ते में उग्र हो गई। हमदर्द चौक पर आगजनी की भी घटना हुई है। इसमें भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर भी शामिल हैं, लेकिन भीड़ उनकी बात भी नहीं मान रही है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने यातायात को भी व्यवस्थित नहीं किया, इसलिए कई वाहन भीड़ में फंस गए। इनमें स्कूली वाहन भी रहे। फिलहाल प्रदर्शनकारियों को पटियाला हाउस कोर्ट पुराना क़िला रोड से वापस इंडिया गेट की तरफ घुमा दिया गया है।

यह भीड़ कनॉट प्लेस की ओर बढ़ रही है, जिनमें ज्यादातर लोगों के हाथों में लाठियां हैं। इससे अव्यवस्था का खतरा पैदा हो गया है । चिंताजनक बात की दिल्ली पुलिस भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के आने और इतनी भीड़ के आने को लेकर बेपरवाह रही, इसलिए अर्ध सैनिक बल को भी तैनात नहीं किया गया।

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