अनुसूचित जाति के तहत आरक्षण देने की मांग को लेकर दलित क्रिश्चियनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा ख़टखटाया है. साथ ही भगवा संगठनों की और से की जाने वाली घर वापसी का भी विरोध किया है.

ध्यान रहे संविधान के 1950 के आदेश के तहत हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अलावा अन्य किसी को अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है. याचिका में इस आदेश को भी चुनौती दी गई है.

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इसके अलावा याचिका में कहा गया कि इस प्रावधान का गलत फायदा संघ परिवार दलित क्रिश्चियन और मुस्लिमों को घर वापसी के नाम पर धर्म परिवर्तन करा करा रहे हैं.

इस सबंध में सुप्रीम कोर्ट में 2004 से लंबित मामले की सुनवाई करने की भी अपील की गई. जिसमे केंद्र सरकार ने अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है.

याचिका में कहा गया कि स तरह यह नियम क्रिश्चियन दलितों के साथ भेदभाव करता है और सरकारों को हिंदू धर्म को पसंद करने का विशेषाधिकार भी देता है. और समानता और धर्मनिरपेक्षताका भी उल्लंघन करता है.

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