तिब्बत धर्मगुरु दलाई लामा ने चीनी की शान में कसीदें पढ़ने के दौरान भारतीयों का अपमान करने से भी नहीं चूंके. उन्होंने भारतीयों को आलसी करार दिया.

इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि  चीनियों की तुलना में मुझे लगता है कि भारत के लोग आलसी हैं. हालांकि उन्होंने इस की वजह मौसम को बताया. उन्होंने कहा कि यह जलवायु के चलते हो सकता है. उन्होंने कहा कि भारत विश्व में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

इस दौरान उन्होंने चीन के साथ रिश्तें सुधारने पर जोर दिया और कहा, हम चीन के साथ ही रहना चाहते हैं और बदलाव की अपेक्षा करते हैं. उन्होंने कहा कि तिब्बत की अपनी अलग संस्कृति है और जैसे चीनी लोग अपने देश को प्यार करते हैं, वैसे ही हम अपने राष्ट्र को चाहते हैं.

तिब्बत की अहिमयत गिनवाते हुए दलाई ने कहा कि यहां से कई नदियां निकलती हैं, जिनकी मदद से करोड़ों लोग जीवन जी रहे हैं, ऐसे में तिब्बत का महत्व को समझा जा सकता है. चीन के साथ खराब हुए अपने रिश्तों का ठीकरा नेताओं पर फोड़ते हुए उन्होंने कहा, परेशानियां तब बढ़ जाती है, जब कुछ नेता चीजों को बदलने में लग जाते हैं.

उन्‍होंने कहा कि तिब्‍बत, चीन से आजादी नहीं चाहता है, बल्कि वह इस पूरे इलाके में विकास चाहता है. उन्‍होंने यहां तक भी कहा कि तिब्‍बती चीन के साथ रहना चाहते हैं, तिब्‍बत की संस्‍कृति और लिपि अलग है. लिहाजा चीन को भी तिब्‍बती संस्‍कृति और विरासत का सम्‍मान करना चाहिए.

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