Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

दलाई लामा बोले – दुनिया भर में शिया और सुन्नी मुसलमान आपस में लड़ रहे

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तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने शनिवार को कहा कि दुनिया को अहिंसा और अनुकम्पा के प्राचीन भारतीय मूल्यों की जरूरत है। दलाई लामा महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर में तीन दिवसीय वैश्विक बौद्ध धर्मसभा के मद्देनजर पत्रकारों से बात कर रहे थे।

दलाई लामा ने कहा, ‘हम हर जगह संघर्ष देख सकते हैं। जब भी मैं ऐसे संघर्षों के बारे में सुनता हूं तो मुझे तकलीफ होती है। इस वक्त दुनिया शांति से रह सकती है अगर वे अनुकम्पा और अहिंसा के मूल्यों का पालन करें।’ वैचारिक मतभेदों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘ये दार्शनिक मतभेद हैं लेकिन शांतिपूर्वक जीने के लिए सहिष्णुता की आवश्यकता है। अगर समुदाय खुश है तो व्यक्ति भी खुश होगा।’

उन्होंने कहा, ‘मैं हमेशा अपने आप को भारत का बेटा कहता हूं। चीन के पत्रकार इसे लेकर मुझ पर सवाल उठाते हैं। मैं कहता हूं कि हालांकि मैं शारीरिक रूप से तिब्बती हूं लेकिन मैंने अपने जीवन के 60 साल भारत में बिताए हैं।’

इससे पहले गुरुवार को उन्होने कहा, “विश्व के कई हिस्सों में शिया और सुन्नी मुसलमान आपस में लड़ रहे हैं लेकिन भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा जैसी उच्च मूल्यों वाली शिक्षा प्रणाली विश्व को अपनाने की आवश्यकता है। भारत में बिना किसी बंधन के वास्तविक करूणा नजर आती है।”

गुरुवार को 24वें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन मेमोरियल व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा, “धार्मिक शिक्षा के स्थान पर अपनी शिक्षा प्रणाली में अहिंसा, प्रेम, दयालुता और करूणा जैसे मानसिक गुणवत्ता वाले विषयों को शामिल किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व में लोग धर्म और अपनी क्षेत्रीयता को लेकर आपस में लड़ रहे हैं। भारत को अपनी 3000 साल पुरानी उच्च नैतिक परंपरा वाली शिक्षा प्रणाली में नई क्रांति लाने की आवश्यकता है ताकि उसे आधुनिक शिक्षा में बदला जा सके।

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