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कोलकाता | नोट बंदी के बाद जहाँ पुरे देश में करेंसी की भारी किल्लत है वही मोदी सरकार लगातार कह रही है की हालात सामान्य हो रहे है. जबकि हकीकत में ऐसा नही दिख रहा. अभी भी बैंकों और एटीएम के सामने लम्बी लम्बी कतारे देखी जा सकती है. हालाँकि केंद्र सरकार इस समस्या को दूर करने के लिए भरसक प्रयास कर रही है. देश की चारो करेंसी प्रिंटिंग प्रेस में दो शिफ्टो में 12-12 घंटे नोटों की छपाई चल रही है.

इतना सब करने के बावजूद लोगो तक पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं पहुँच पा रहा है. इसके अलावा मोदी सरकार के सामने अब एक नयी समस्या खडी हो गयी है. पश्चिम बंगाल की प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारियों ने 12 घंटे काम करने से मना कर दिया है. इसका असर नोटों की छपाई पर पड़ेगा. नोटों की किल्लत से झूझ रहे लोगो को और परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

मिली जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल की सालबोनी प्रिंटिंग प्रेस में 12-12 घंटे की दो शिफ्टो में नोटों की छपाई का काम चल रहा है. यहाँ रोजाना 6 करोड़ 80 लाख नोट छप रहे है. अब यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों ने ओवरटाइम करने से मना कर दिया है. कर्मचारियों का कहना है की वो 9 घंटे से ज्यादा काम नही कर सकेंगे. इस प्रिंटिंग प्रेस में 10 रूपए से लेकर 2000 रूपए के नोट छपते है.

कर्मचारियों की एसोसिएशन के अनुसार 14 दिसम्बर के बाद से यहाँ काम कर रहे कर्मचारी बीमार पड़ने लगे है. वो पिछले 50 दिन से 3-3 घंटे ओवरटाइम कर रहे है. एसोसिएशन का कहना है की कर्मचारियों को 12 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, लेकिन अब कर्मचारी तय समय से ज्यादा काम नही कर सकेंगे. ऐसा होने की स्थिति में नोटों की समस्या जल्द खत्म होने के आसार और कम हो जायेंगे.


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