अजमेर दरगाह बम विस्फोट मामले में आरोपी साध्वी प्रज्ञा और इंद्रेश कुमार को क्लीनचिट देने पर जयपुर कोर्ट ने एनआईए को खरी-खरी सुनाई है. कोर्ट ने कहा कि किसी भी आरोपी को आपके क्लीनचिट दे देने से क्लीन चिट नहीं मिल जाएगी. कोर्ट ने कहा, पूरी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कीजिए उसके बाद ही एनआईए कोर्ट इनके क्लीनचीट पर संज्ञान लेगा.

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी  के बाद सोमवार को एनआईए कोर्ट में इंद्रेश कुमार, साध्वी प्रज्ञा, रमेश और जयंती दास के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई. जिसमें से बेस्ट बेकरी कांड के आरोपी रमेश और जयंती दास की मौत जेल में हो चुकी है. कोर्ट ने इस क्लोजर रिपोर्ट पर संज्ञान लेने के लिए 17 अप्रैल की तारीख तय की है.

इसके अलावा कोर्ट ने एनआईए के डायरेक्टर समेत कोझीको के कलेक्टर और इंदौर आईजी को भी नोटिस जारी किया है। एनआईए डायरेक्टर से कोर्ट ने पूछा है कि संदीप डांगे और रामचंद कालसांगरा और सुरेश नायर जैसे भगोड़े अभियुक्तों को पकड़ने के लिए अभी तक प्रयास क्यों नहीं किया गया है.

याद रहे 9 साल पहले अजमेर स्थित सूफी ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती दरगाह में हुए बम धमाके को लेकर एनआईए  ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि दोनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने की वजह से क्लीनचिट दी गई है. इस मामलें में कोर्ट ने असीमानंद समेत सात आरोपियों को बरी कर दिया था, जबकि दोषी पाए गए भवेश पटेल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता देवेंद्र गुप्ता और को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

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