हज सब्सिडी समाप्त करने और नई हज नीति को लेकर बनाई गई उच्चस्तरीय समिति 3 महीने में देगी. ये जानकारी अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज लोकसभा में दी.

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान नकवी ने बताया कि  ‘हमारी सरकार ने नई हज नीति के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है जिसमें अनुभवी और विद्वान लोग हैं. यह समिति आगामी तीन महीने में नीति बनाने की दिशा में काम करेगी.’ उन्होंने हज सब्सिडी के संबंध में पूछे गये प्रश्न के उत्तर में कहा कि साल 2012 में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद तत्कालीन सरकार ने चरणबद्ध तरीके से हज सब्सिडी को समाप्त करने का निर्णय लिया था.

नकवी ने आगे कहा कि भारत के हाजियों से हज के लिए पाकिस्तान, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे देशों की तुलना में कम शुल्क लिया जाता है. उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया में हज के लिए प्रति व्यक्ति 2,10,000 रुपये, पाकिस्तान में 2,02,000 रुपये और बांग्लादेश में प्रति हाजी 3,08,449 और दूसरी श्रेणी में 2,60,454 रुपये लिये जाते हैं जबकि भारत में यह शुल्क 1,47,200 रुपये और एक अन्य श्रेणी में 2,19,000 रपये है.

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नकवी ने कहा कि निजी टूर ऑपरेटर्स द्वारा हजयात्रियों से वसूली जाने वाली रकम के बारे में भी सरकार समय-समय पर समीक्षा करती है और इस बार भी करेगी. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के पास 70 वीआईपी लोगों को हज भेजने का कोटा होता है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कोटे को खत्म करके कहा कि इसके तहत वीआईपी की जगह गरीब से गरीब मुस्लिम धर्मावलंबियों को हज भेजा जाए.

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